Hanuman Chalisa

सद्गुण और संस्कार पर काव्य रचना...

सुशील कुमार शर्मा
दोहे-
 
सद्गुण को अपनाइए, सद्गुण सुख की खान।
सद्गुण से साहस मिले, नीचा हो अभिमान।
 
बुरे विचारों को तजे, बने आचरण शील।
सद्गुण से सिंचित करे, विनय-विवेक-सुशील।
 
सद्गुण से वंचित रहें, काम-क्रोध-मद-लोभ।
कायरता मन में रहे, जीवन बने विक्षोभ।
 
साहस और विवेक हैं, सद्गुण की पहचान।
जीवन संयम से जियो, सब कोई दे सम्मान।
 
कांटोंभरा है रास्ता, सद्गुण से आसान।
सद्गुण जीवन में रहे, क्यों भटके इंसान।
 
कुंडलियां-
 
चिंतन ऐसा कीजिए, मन में रहे उमंग।
जीवन दशा सुधारिए, मन सद्गुण के संग।
 
मन सद्गुण के संग, लगन अंदर हो ऐसी।
जीवन बने पतंग, डोर सद्गुण के जैसी।
 
कह सुशील कविराय, मथो तुम ऐसा मंथन।
जीवन हो नवनीत, मथानी जैसा चिंतन।
 
जीवन के निर्माण में, सद्गुण बनें विशिष्ट।
संस्कार गर न मिलें, बालक बने अशिष्ट।
 
बालक बनें अशिष्ट, आचरण आती लघुता।
जीवन हो प्रतिकूल, बढ़े मन अंदर पशुता।
 
कह सुशील कविराय, संयमित ऐसा हो मन।
सुन्दर-सुघड़ विचार, नियंत्रित होता जीवन।
 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

रात में ये 3 चीजें खाने से बढ़ सकता है वजन

डॉक्टर बोले: रोज 10 मिनट चलने से कम हो सकती हैं ये बीमारियां

Sattu Recipes: गर्मी में सेहत को लाभ देगी सत्तू की 5 बेहतरीन रेसिपीज

Fengshui Tips: फेंगशुई: इन 3 बदलावों से घर में आएगा पैसा ही पैसा

गर्मी में बेहतरीन स्वादिष्‍ट आम रस कैसे बनाएं, पढ़ें स्टेप बाय स्टेप विधि और खास कुकिंग टिप्स

सभी देखें

नवीनतम

बाल एकांकी: नालंदा की सुनो कहानी

जीवन एक उत्सव है, तो वन महोत्सव है!

राकेश धर द्विवेदी की हिंदी कविता ‘तुझसे बिछड़कर....’

Adi Shankaracharya: जयंती विशेष: आदि शंकराचार्य के बारे में 10 अद्भुत बातें जो हर हिन्दू को जाननी चाहिए

Saint Surdas Jayanti: संत सूरदास कौन थे, जानें उनके जीवन की 5 अनसुनी बातें

अगला लेख