रोहित जैन ND जब से मैंने वो हँसी सा पैकर देखा हैझूमता गाता हुआ हर मंज़र देखा हैराह में मिलने वालों से लेते हैं अपनी ही खबरभूले अपना घर जब से उसका घर देखा हैफूलों में भी अब देखो इक नई सी रंगत आई है बागों ने भी शायद रूप-समंदर...