- भवानी प्रसाद मिश्र NDND जैसे पानी बहता है नदी में इस तरह बहा है खूनबीसवीं सदी में अब इक्कीसवीं में शायद समूचा आदमी बहेगादेखें, उसके बाद क्या कुछ बाकी बच रहेगा चंद्रमा शुक्र और मंगल तो क्या रहेंगे हमारे इतने विज्ञान को बैचारे मंगल वगैरा क्या सहेंगे सूरज का...