- शीतल मेहता SubratoND मुझे अपने स्पर्श का एहसास दे दोमेरी घड़कनों को अपनी श्वास दे दोनि:स्वार्थ नहीं है मेरी प्रीत तुम्हारे लिए जो माँगा नहीं कभी तुमसे वह स्वार्थ दे दोकोई मतलब नहीं मुझे तुम्हारे कल से,जिसमें तुम ही तुम हो वह आज दे दो।नज़रों की बेकरारी कैसे समझाऊँ...