- राहुल उपाध्याय SubratoND पतझड़ के पत्तेजो जमीं पे गिरे हैंचमकते-दमकतेसुनहरे हैं।पत्ते जो पेड़ परअब भी लगे हैंवो मेरे दोस्त,सुन, हरे हैंमौसम से सीखोराज़ इसमें बड़ा हैजो जड़ से जुड़ा हैवो अब भी खड़ा हैरंग जिसने बदलावो कूढ़े में पड़ा है SubratoND घमंड से फ़ूलाघना कोहरासोचता है देगासूरज को हराहो...