कुमार अंबुजNDND इसका रंग राख का रंग हैइसका वजन राख का वजन हैजब सारी गंध उड़ जाती हैंतो राख की गंध बची रहती हैइसे मुट्ठी में भरोयह एक देह हैइसे छोड़ो, यह धीरे-धीरे झरेगीऔर हथेली में, लकीरों में बची रहेगीहर क्रूरता, अपमान, प्रेम और संपूर्णता के बादयही राख हैजो उड़कर...