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रिश्ते

Webdunia
- जितेंद्र चौहान
ND

सच
पहले रिश्ते
समंदर हुआ करते थे
कितने ही
ज्वार- भाटे आएँ
पर रिश्ते बदलते नहीं थे।

आज रिश्ते गिरगिट हो गए हैं
आदमी का वक्त बदलते ही
रिश्ते भी
रंग बदलते हैं।

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