- जितेंद्र चौहान ND समंदर तुम कितने बड़े हो हमारे लिए और तुम कितने छोटे हो अपनी लहरों के लिए लहरें बार-बार तुम्हारे किनारों पर आती हैंऔर खाली हाथ लौट जाती हैंतुम लहरों से पूछकर बतानावे क्या चाहती हैंकिनारों से।...