Hanuman Chalisa

लघुकथा : प्यार की अठन्नी

Webdunia
- रामजी मिश्र 'मित्र'

खरोसे अपने खेत की तरफ गया तो देखा फसल धूं-धूं करके जल रही थी। अब प्राणों की परवाह छोड़ उसे बुझाने वह खेत में कूद पड़ा आग से जूझता रहा। आसपास के किसान दौड़ आए। सबने मदद की लेकिन खरोसे का गन्ना स्वाहा हो चुका था।
 
खेत के ऊपर से निकले बिजली के जर्जर तार खरोसे को बर्बाद कर चुके थे। सालभर की मेहनत मिट्टी में मिल गई थी। इस बार खरोसे ने खूब सारा कर्जा लिया और खेत में धान बो दिया। खूब मेहनत की। दिन-रात उन बिजली के तारों को देखता और उनसे रहम की भीख मांगता।
 
फसल तैयार हुई और अच्छी कटी। भले बारिश न हुई हो लेकिन उसने फिर भी किराए के इंजन से सिंचाई की थी, सो धान ठीक-ठाक हुए। लागत कुछ ज्यादा आ चुकी थी। कर्जा पहले से माथे था।
 
खरोसे ने समय आते ही गेहूं बोने का फैसला किया। इस बार वह दो बीघे का मालिक किसान कुछ और भू-स्वामियों के पास गया और ठेके पर खेती मांगी। कुछ पैसा नकद देकर उसने आठ-दस बीघा खेती ठेका पर ले ली। दो बीघा खेती पुश्तैनी थी। खरोसे घर आया तो बच्चे पड़ोस के डिप्टी साहब के बच्चों के नए कपड़ों को देखकर कपड़ों की जिद करने लगे।
 
पत्नी को फटी-पुरानी साड़ी में देखा तो बोला- 'ए मूलो सम्हालो बच्चों को, इस बार सबकी मुरादें पूरी होंगी लेकिन अभी तो बस कुछ समय लगेगा।' मूलो भी खरोसे को समझती थी। तभी सबसे छोटी लड़की, जो अभी दो साल की है, टॉफी लेने के लिए धरती पर लोट गई। मूलो ने थोड़ी देर समझाया फिर ठोंक-पीट दिया। पर बच्चे का मन फिर भी शांत न हुआ तो उसे अपनी छाती से चिपका ममत्व के रस में डुबो दिया।
 
बच्चे की मासूम जिद पर ममता का अमृत हमेशा की तरह फिर भारी हुआ। फसल पकने तक पूरा घर खुशहाली के सपने देख रहा था। कुछ महीनों में फसल तैयार थी। कर्ज देने वाले लोग खरोसे के घर रोज तगादा करने आने लगे। खरोसे की पत्नी को यह सब अच्छा न लगता।
 
शाम को खरोसे ने फैसला किया कि सुबह से फसल कटेगी। रात को वह सपरिवार सो गया। खरोसे की पत्नी मूलो की अर्द्धरात्रि को आंख खुली तो लगा पानी बरस रहा है। छप्परिया से बाहर झांक के देखा तो चीख उठी, इतने बड़े-बड़े ओले? वह झट पति को जगाने दौड़ी तो देखा खरोसे बिस्तर से गायब था।
 
उसे लगा पौ फट रही है। बच्चे भी जागने लगे। वह खेत की ओर दौड़ी। बारिश थम रही थी। एक बच्चा गोदी में था, शेष चार पीछे रोते-गाते दौड़े जा रहे थे। वह खेत पर पहुंची तो देखा फसल बर्बाद हो चुकी थी। तभी उसकी नजर खरोसे पे गई। जो आराम से शांत भाव से लेटा था। ए उठो देखो क्या हो गया, लेकिन उन करुण शब्दों को सुनने भी खरोसे न उठा। थोड़े ही समय में हाहाकार मच गया।
 
अधिकारी जांच को आए और जांच में पाया कि उसकी मौत हृदयाघात और आकाशीय पत्थरों की चोट से हुई है न कि फसल बर्बाद होने से। मूलो भी दुख सहन न कर पाई और बच्चों सहित जान देने का काम किया। मूलो की सबसे छोटी बच्ची, जो अब तीन साल के लगभग थी, दैवयोग से बच गई।
 
त्रासदी के बाद तुरंत स्वर्गीय खरोसे के घर फसल के नुकसान की भरपाई के लिए शासन ने एक सौ रुपए का चेक जारी कर दिया। वह सौ रुपए अब उस बच्ची के लिए थे। उस अनाथ बच्ची को खैरात की दया में दान किए इतने पैसे नहीं चाहिए थे। वह मां द्वारा चोरी से दी गई अठन्नी चाहती थी जिससे खरीदी टॉफी में प्यार था। वह प्यार से दिए सौ के चेक की नहीं, मार खाकर पाने वाली अठन्नी की भूखी थी। अब उसे तलाश थी टॉफियों से अधिक उस ममत्वभरे अमृत की जिसे वह खो चुकी थी।
 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

Main Door Vastu: मुख्य दरवाजे पर भूलकर भी न लगाएं ऐसी तस्वीरें, घर में आती है बदहाली

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

गैस सिलेंडर खत्म होने का डर छू मंतर! बिना LPG गैस के भी पक सकता है खाना, ये 7 तरीके हैं सबसे बेस्ट

सभी देखें

नवीनतम

वर्तमान में जीने वाले : एक पद्य कथा

एक सामयिक व्यंग्य: विश्वशांति का महायुद्ध

Guru Tegh Bahadur: गुरु तेग बहादुर जयंती, जानें सिख धर्म में उनका योगदान

प्रेम कविता: जिनके लिए

World Health Day Slogans: विश्‍व स्वास्थ दिवस पर 10 बेहतरीन स्लोगन्स और प्रभावशाली प्रेरक नारे