Dharma Sangrah

मनुष्य की क्रूूरता दर्शाती लघुकथा : प्रतिघात

आलोक कुमार सातपुते
उसने उसे काट चुके मच्छर को अपनी मुठ्ठी में जिंदा पकड़ लिया और उसे उसके पंखों से पकड़कर वहीं घूमती हुई दो लाल चीटियों के हवाले कर दिया। उन दोनों चीटियों के बीच फड़फड़ाते हुए उस मच्छर को देखकर उसे आनंद की अनुभूति होने लगी। 

 
दोंनों चीटियां अब उस मच्छर को अपने झुंड की ओर ले जाने लगीं तभी उन्हें दो चीटियां और मिल गईं। अब वह मच्छर और अधिक तड़पकर फड़फड़ाने लगा। ऐसा देखकर उस व्यक्ति को और अधिक आनंद आने लगा।

थोड़ी ही देर बाद चीटियां उस मच्छर को खींचती हुई अपने झुंड के करीब ले गईं। उस मच्छर की तड़पन जल्द ही शांत न हो जाए, सोचकर उसने उसे चीटियां से छुड़ा लिया। मच्छर मृतप्रायः स्थिति में पहुंच चुका था...उसे बड़ी ही निराशा हुई। और अंत में उसने उसे चीटियों के झुंड के हवाले कर दिया।...अब उसके चेहरे पर विजयी भाव थे।
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