suvichar

ईस्टर

Webdunia
NDND
- चंद्र मौलेश्वर प्रसाद

मैं बस में सफर कर रहा था। एक वृ‍द्ध मेरी बगल में बैठा था। हाथ में एक खूबसूरत गुलदस्ता (बुके) लिए हुए वह कुछ-न-कुछ बुदबुदा रहा था। ऐसा लगता था कि उसके जीवन में कुछ ऐसी दुखद घटना घटी है, जो उसके उदास चेहरे की झुर्रियों में इंगित हो गई है।

एक...दो...तीन...चार...पाँच, वह अपनी उँगलियों पर गिनकर किसी सोच में डूब गया। अनायास ही उसकी नजर पास में बैठी एक पाँच वर्षीय लड़की पर पड़ी जो उस बुके की ओर लालायित नजरों से देख रही थी। जब उसकी नजरें उस वृ‍द्ध की नजरों से मिलीं तो वह मुस्कुराई और फिर उसी बुके की ओर घूरने लगी।

ठीक है, मैं अपनी पत्नी से कह दूँगा कि मैंने यह बुके तुम्हें दे दिया है। यह सोचकर वह वृ्द्ध उस लड़की के हाथ में गुलदस्ता थमाकर बस से उतर गया। मेरी नजरें उसका पीछा करती रहीं। वह वृद्ध करीब के कब्रिस्तान की ओर चल पड़ा। मुझे याद आया कि आज ईस्टर है।

साभार- मसि-काग द

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Holi Thandai: ऐसे बनाएं होली पर भांग की ठंडाई, त्योहार का आनंद हो जाएगा दोगुना

Holi Essay: होलाष्टक, होलिका दहन और धुलेंड़ी पर हिन्दी में रोचक निबंध

शक्ति के बिना अधूरे हैं शक्तिमान: नारी शक्ति के 8 स्वर्णिम प्रमाण

हिन्दी कविता : होलिका दहन

होली पर लघुकथा: स्मृति के रंग

सभी देखें

नवीनतम

Holi recipes: रंगों और स्वाद का संगम: होली-धुलेंड़ी पर्व के 5 सबसे बेहतरीन पकवान

Happy Holi Wishes 2026: रंगों के त्योहार होली पर अपनों को भेजें ये 10 सबसे मंगलकारी शुभकामनाएं

Low Blood Sugar: हाइपोग्लाइसीमिया, बॉडी में शुगर कम होने पर क्या लक्षण महसूस होते हैं?

Holi Thandai: ऐसे बनाएं होली पर भांग की ठंडाई, त्योहार का आनंद हो जाएगा दोगुना

National Science Day: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?