Hanuman Chalisa

पाँच रुपए!

लघुकथा

Webdunia
डॉ. राकेश शिंदे
ND
मैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाग (जिला धार) आदिवासी क्षेत्र में पदस्थ हूँ। मेरा परिवार महू में होने से मैं अपडाउन करता हूँ। बाग टांडा क्षेत्र से कई आदिवासी परिवार मजदूरी के लिए महू-इंदौर पलायन करते रहते हैं। एक शनिवार मैं महू में ड्रीमलैंड चौराहे से पैदल जा रहा था अचानक मेरे ठीक सामने एक गरीब बुजुर्ग आदिवासी महिला चलते-चलते रुक गई।

वह मुझे गौर से देखती रही फिर आदिवासी भाषा में कहने लगी- डॉक्टर साहब, मैंने तुम्हें पहचान लिया। दो साल पहले मेरी बहू की फौरी (प्रसव) आपने बाग अस्पताल में की थी। बड़ी मुश्किल से बहू और बच्चे की जान बचाई थी।

इतना कहकर उसने अपनी थैली में से पाँच रुपए का नोट निकाला व मुझे देने लगी। साथ ही कहा- डॉक्टर साहब, चाय पी लेना। उसके चेहरे पर उस समय खुशी और आत्मीयता की चमक थी। अचानक वो पाँच रुपए मुझे पचास हजार से भी ज्यादा लगने लगे।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

नवीनतम

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

Daily Vastu Tips: घर में हर दिन खुश रहना है तो आज ही अपनाएं ये सरल वास्तु टिप्स

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी