क्षमा-याचना : आशुतोषी मां नर्मदा...

सुशील कुमार शर्मा
(एक भक्त की क्षमा-याचना)


आशुतोषी मां नर्मदा अभय का वरदान दो, 
शमित हो सब पाप मेरे ऐसा अंतरज्ञान दो। 
 
विषम अंतरदाह की पीड़ा से मुझे मुक्त करो, 
हे मकरवाहिनी पापों से मन को रिक्त करो। 
 
मैंने निचोड़ा है आपके तट के खजाने को, 
आपको ही नहीं लूटा मैंने लूटा है जमाने को। 
 
मैंने बिगाड़ा आवरण, पर्यावरण इस क्षेत्र का, 
रेत लूटी और काटा जंगल पूरे परिक्षेत्र का।
 
मैंने अमिट अत्याचार कर दुर्गति आपकी बनाई है, 
लूटकर तट संपदा कब्र अपनी सजाई है।
 
सत्ता का सुख मिला मुझे आपके आशीषों से, 
आपको ही लूट डाला मिलकर सत्ताधीशों से।
 
हे धन्य धारा मां नर्मदे अब पड़ा तेरी शरण, 
मां अब अनुकूल होओ मेरा शीश अब तेरे चरण।
 
उमड़ता परिताप पश्चाताप का अब विकल्प है, 
अब न होगा कोई पाप तेरे हितार्थ ये संकल्प है।
 
आशुतोषी मां नर्मदा अभय का वरदान दो, 
शमित हो सब पाप मेरे ऐसा अंतरज्ञान दो। 
 
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Sai baba controversy: साईं बाबा के खिलाफ बोलने वालों के साईं भक्तों से 12 सवाल, 9 सवाल भक्तों के भी पढ़ें

shardiya navratri 2025: शारदीय नवरात्रि की तिथि, मुहूर्त, घट स्थापना, पूजा विधि, व्रत नियम और महत्व

Solar Eclipse 2025: 21 सितंबर वर्ष का 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण, 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

गणेश चतुर्थी की कथाएं: गणेश जी की असली कहानी क्या है?

Ganesh chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के बाद यदि नहीं करना चाहते हैं गणपति मूर्ति का विसर्जन तो क्या करें?

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: अगस्त का अंत और सफलता की नई शुरुआत, यही कह रहा है 31 August का दैनिक राशिफल

31 अगस्त 2025 : आपका जन्मदिन

31 अगस्त 2025, रविवार के शुभ मुहूर्त

Mahalaxmi Vrat 2025: 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत में क्या करते हैं?

सितंबर माह के पहले सप्ताह में किसके चमकेंगे सितारे, जानें साप्ताहिक राशिफल 01 से 07 September तक

अगला लेख