मैं करूं वंदना भारत मां...

श्रीमती इन्दु पाराशर
* वंदना 
 
 
मैं करूं वंदना भारत मां।
 
कल-कल झरने, शीतल जल के,
वन-उपवन, फल से लदे हुए,
है मलय गंध-युत, शीत पवन,
श्यामल-श्यामल, धरती पावन
शुचि मंगल प्राणदायिनी तू।
 
मैं करूं वंदना भारत मां।
 
दूधिया चांदनी, की वर्षा,
है मुग्ध यामिनी, पुलक भरी,
है सुन्दर विकच-कुसुम मय द्रुम,
वाणी से, मधु-सौरभ झरता
सुखमय, वरदानदायिनी तू़,
 
मैं करूं वंदना भारत मां।
साभार - बच्चो देश तुम्हारा
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