Biodata Maker

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

इंदौर की सबसे स्‍वादिष्‍ट गली सराफा हुई बेस्‍वाद, क्‍या है ज्वेलरी व्‍यापारियों और चाट-चौपाटी वालों का विवाद?

Advertiesment
हमें फॉलो करें Sarafa indore

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 (15:35 IST)
करीब 80 साल पहले इंदौर के राजवाड़ा से सटे सराफा बाजार में शुरू हुई सराफा चौपाटी पूरी दुनिया में अपने स्‍वाद के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब धीरे- धीरे यह चौपाटी न सिर्फ अपनी मूल तासीर को छोड़कर बेस्‍वाद होती जा रही है, बल्‍कि विवादों में भी आ गई है। सराफा बाजार को लेकर एक नगर निगम की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बारूद के ढेर पर बैठी है और किसी तरह की अनहोनी में यहां बड़ा नुकसान हो सकता है, वहीं सोना चांदी व्‍यापारी और रात में तमाम व्‍यंजनों की दुकानें लगाने वालों के बीच इस जगह को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

क्‍या है सोना-चांदी बनाम व्‍यंजन विवाद : हाल ही में सराफा में सोना चांदी के व्‍यापारी और कई तरह के व्‍यंजन की दुकानें लगाने वाले दुकानदारों के बीच विवाद शुरू हो गया है। सराफा व्यापारियों का कहना है कि रात में चौपाटी लगाने वाले दुकानदार शाम 7 बजे ही आने लग जाते हैं और उनकी जेवर की दुकानों के आगे दुकानें लगाते हैं और रोकने पर विवाद करते हैं। उन्होंने यहां की 80 परंपरागत खाद्य पदार्थों की दुकानों को ही चौपाटी पर लगाने देने की बात कही है। शेष दुकानों को कहीं ओर शिफ्ट करने के लिए प्रशासन से मांग की है। जबकि कुछ सराफा व्यापारी तो चाहते हैं कि चाट चौपाटी की दुकानें लगें तो सभी लगें, नहीं तो एक भी नहीं रहनी चाहिए। दअरसल, कई दशकों यह परंपरा है कि दिनभर सराफा व्‍यापारी दुकाने लगाते हैं और शाम को जब वे दुकानें बंद करते हैं तो उन दुकानों के आगे चौपाटी वाले दुकानें लगाते हैं जो रातभर चलती हैं। अब दोनों व्‍यापारी वर्ग में इसे लेकर कलेश हो गया है।

क्‍या कहते हैं व्‍यापारी : इंदौर सराफा व्‍यापारी एसोसिशन अध्‍यक्ष हुकुम सोनी ने बताया कि एमआईसी ने कहा है कि परंपरागत 80 दुकानों को ही जगह देना है, लेकिन अब तक नहीं हटाया। अब गुंडागर्दी हो रही है, विवाद और छेड़छाड़ होने लगी है, फैमिली आने से कतराने लगी है। अब नए लोग नुडल्‍स और मोमोज खाने आते हैं।

क्‍या बारूद के ढेर पर है चौपाटी : बता दें कि करीब दो साल पहले हरदा की पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट और जनहानि के बाद इंदौर की सराफा चाट चौपाटी को लेकर नगर निगम इंदौर ने एक समिति का गठन कर जांच कराई थी। इसमें यह निष्कर्ष निकला कि सराफा चौपाटी बारूद के ढेर पर बैठी है, क्योंकि यह चौपाटी खुले में लगती है और यहां संकरी गलियों में गैस भट्टियों का बगैर किसी सुरक्षा और सतर्कता के इस्तेमाल होता है। कई दुकानों में तो हाथों हाथ व्‍यंजन बनाए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ सराफा में सोना-चांदी का काम होता है और उसमें तेजाब की जरूरत होती है, ज्‍वेलरी बनाने में गैस का भी इस्‍तेमाल होता है। ऐसे में इन संकरी गलियां में किसी तरह की अनहोनी पर न तो फायर ब्रिगेड के वाहनों पहुंच पाएंगे और न ही किसी तरह का रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है। ऐसे में आम लोगों के साथ ही सभी तरह के व्‍यापारियों की सुरक्षा को लेकर बडा सवाल बना हुआ है।

इंदौर प्रशासन कर रहा शिफ्टिंग पर विचार : इंदौर नगर निगम की रिपोर्ट के बाद से इस खान-पान की चौपाटी को शिफ्ट करने का विचार किया जा रहा है। बता दें कि पिछले दिनों सराफा व्यापारियों ने भी मिठाइयों और नमकीन की परंपरागत दुकानों को छोड़कर अन्य दुकानों को यहां से हटाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया था। अब दोनों पक्षों में यह विवाद बढता जा रहा है। मांग की जा रही है कि परंपरागत मिठाई की दुकानें ही सराफा में रहने दी जाएं।

सराफा क्‍यों है मशहूर : इंदौर के स्वाद की राजधानी बनने की बात करें तो करीब 80 साल पहले इसकी शुरुआत सराफा बाजार में जेवर और घेवर की बिक्री से हुई। चूंकि, सराफा होल्कर रियासत के मुख्यालय राजवाड़े के सबसे समीप था। इसलिए यह सोना चांदी, हीरे जवाहरात, कपास, अफीम के साथ मावा मिठाइयों और नमकीन का भी बड़ा बाजार बनकर उभरा। यहां मिठाइयों और नमकीन की नामचीन स्थाई दुकानों के साथ ही शाम से देर रात होटलों और ठेलों पर लगने वाली चाट चौपाटी देशभर में अपने स्वाद के लिए मशहूर है। यहां के नमकीन और मिठाइयां प्रसिद्ध हैं।

बेस्‍वाद हुई सराफा चौपाटी : बता दें कि इंदौर की सराफा चौपाटी अपने परंपरागत व्‍यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें गुलाब जामुन, मालपुए, रसगुल्‍ले, नमकीन, मावे की मिठाइयां, भुट्टे का किस, गराडू, दहीबड़ा, जलेगी, रबड़ी, कलाकंद, शिकंजी, हॉट डॉग और चाट आदि शामिल हैं। लेकिन पिछले कुछ साल में यहां चाइनीज आयटम जैसे नुडल्‍स, मंचुरियन, पित्‍जा, बर्गर, मोमोज, पास्‍ता और तमाम तरह के विदेशी व्‍यंजनों ने जगह हथिया ली है, इससे इंदौर का मूल स्‍वाद और तासीर गायब हो गए हैं। दरअसल, वर्तमान में सराफा चाट चौपाटी पर ऐसी दुकानें लगने लगी हैं, जिनका मालवा के मूल व्यंजनों के कोई सरोकार नहीं है। ऐसे में यहां का स्‍वाद लगातार बेस्‍वाद होता जा रहा है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

प्रेमानंद महाराज को क्या देता चाहता है यह मुस्लिम शख्स, लिखी चिट्‍ठी