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अनुभूति का लेखन है लघुकथा

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Shivnath Sahitya Sammelan
Shivnath Sahitya Sammelan: शिवनाथ साहित्य समागम, सीहोर के दो दिवसीय सम्मेलन में साहित्य की विभिन्न विधाओं पर चर्चा एवं विमर्श संपन्न हुआ। इस दौरान लघुकथा विधा पर भी एक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में "लघुकथाओं की भीड़ में कहां गुम हो गई-लघुकथा" विषय पर संवाद एवं विमर्श हुआ। 
 
सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार, लेखक मोहन वर्मा ने किया और वक्ता के रूप में दिल्ली से श्रीमती नीलिमा शर्मा, देवास से श्रीमती यशोधरा भटनागर, इंदौर से श्रीमती दीपा मनीष व्यास एवं विजय सिंह चौहान मंच पर उपस्थित थे। संवाद सत्र में वक्ताओं ने लघुकथाओं के आकार, प्रकार, भाषा,वर्तमान परिदृश्य एवं भविष्य में लघुकथाओं की समृद्धता पर खुलकर बात की गई । 
 
श्रीमती नीलिमा शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि लघुकथा में यदि हम देशज शब्दों का इस्तेमाल करें, हमारे आसपास के परिवेश और बोलिया को स्थान दें ताकि पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी से जोड़ा जा सके वही श्रीमती भटनागर ने कहा कि लघुकथा के आकार प्रकार, भाषा, कथ्य और शिल्प के माध्यम से लघुकथाओं ने अन्य विधाओं के साथ अपनी गहरी पैठ बनाई है।
 
श्रीमती दीपा मनीष व्यास ने कहा कि लघुकथा का भविष्य सुखद है और लघुकथा भीड़ में भी पहचानी जा सकती है। लघुकथा के जानकार उसके फॉर्मेट के हिसाब से आसानी से पहचान सकते हैं कि यह लघुकथा के पैमाने पर खरी उतरती है या नहीं।  इतनी मात्रा में लघुकथाओं का सृजन किया जाना अपने आप में सुखद संकेत है।
 
विजय सिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि लघुकथा किसी क्षण को पकड़ कर अनुभूति से लिखी जाने वाली विधा है जिसका आकार प्रकार, भाषा, अनुभूति में लिप्त होती है। यह शब्दों का खेल नहीं संकेत की भाषा है जो अंत में अपने पाठकों के दिल में छाप छोड़ जाती है। इस दौरान देशभर से आए साहित्यकार, लेखक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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