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अमेरिका में रखे हैं एलियंस के शव, US दुनिया से क्यों छिपा रहा है यह अहम जानकारी

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राम यादव

Alien bodies in US: अमेरिका के पश्चिमी राज्य यूटा में स्थित सेना के जीव विज्ञान परीक्षण केंद्र (Biologocal Test Center) के भारी भरकम इस्पाती दरवाजों के पीछे, एक बड़े से भूमिगत हॉल में, सिलिंडर नुमा कैप्सूलों में कई परग्रही (एलियन) शव रखे हुए हैं। अधिकतर लोग विश्वास नहीं करेंगे कि ये अपार्थिव मृत शरीर 'अज्ञात वस्तुओं' (Un identifide object) के तौर पर जुटाए और वहां गोपनीय ढंग से रखे गए हैं।
 
इस विषय से भलीभांति परिचित अमेरिका के ही एक खोजी, मैक मेव का कहना है, ' मैंने ऐसे दृश्य देखें हैं जिन पर अधिकतर लोग विश्वास नहीं करेंगे। मैं उस क्रैश रिट्रीवल (मलबा पुनरसंग्रह) टीम का एक सदस्य था, जो 1996 की वार्जीन्या घटना के तौर पर जाना जाता है। हमने उस घटना के मृत शरीरों को (यूटा की) इस अत्यंत गोपनीय जगह पर छिपा रखा है। 'कहानी 1991 में अमेरिका के एक नए विध्वंसकारी हथियार के पहले परीक्षण से शुरू होती है। उस साल पहली बार, इस नए हथियार का उपयोग 'अज्ञात उड़न वस्तु' कहलाने वाले एक यूएफओ (UFO) के विरुद्ध किया गया।
 
अंतरिक्ष में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे अमेरिकी शटल यान डिस्कवरी को इस परीक्षण की फिल्म बनानी थी। इसके लिए कैलिफोर्निया में स्थित वान्डेनबर्ग एयर फ़ोर्स बेस (Vandenberg Air force Base) हाई एलर्ट पर था। उन दिनों प्रसिद्ध था कि अमेरिका, संदिग्ध क़िस्म के विमानों या उड़नशील वस्तुओं को मार गिराने के लिए उच्च शक्ति के 'पल्स माइक्रोवेव हथियार' और कुछ मामलों में एक नई तोप प्रणाली इस्तेमाल करता है।
 
यूएफओ गिराने के लिए प्रक्षेपण अस्त्र : पहले परीक्षण के लिए वान्डेनबर्ग एयर फ़ोर्स बेस के राडार एक अज्ञात उड़न वस्तु पर लक्षित थे। आकाश में एक अपूर्व घटना होने जा रही थीः 'हाइपर वेलॉसिटी रेलगन (HVR)' नाम वाले, ध्वनि से भी 7.5 गुना अधिक गतिवान, एक प्रक्षेपण अस्त्र के द्वारा लोहे के प्रक्षेप्य (प्रोजेक्टाइल) दाग कर अज्ञात उड़नशील वस्तुओं को मार गिराने का परीक्षण। अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी द्वारा फ़िल्माई गए इस परीक्षण के वीडियो में साफ़-साफ़ दिख रहा था कि दागे गए प्रोजेक्टाइल की तेज़ गति से बाल-बाल बचता हुआ एक UFO, धरती की तरफ जा रहा है। किसी नई उड़न वस्तु पर सफल निशाना साधने के लिए अमेरिकी वायु सेना को अगले 5 साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
 
मैक मेव का मानना है कि 5 साल बाद, 20 जनवरी, 1996 के दिन ब्राज़ील में जो कुछ हुआ, वह HVR की सफलता का ही एक नूमूना था। उस दिन, बहुत सुबह-सवेरे ही, सिगार के आकार की एक अज्ञात उड़न वस्तु, ब्राज़ील के छोटे से शहर वार्जीन्या से कोई 18 किलोमीटर की दूरी पर, आकाश में दिखाई पड़ती है। पास के ही एक दंपति आउगुस्ता व ओरिको दे फ्राइतास के कृषि फ़ार्म के जानवरों में भयंकर खलबली मच जाती है। पति-पत्नी जाग जाते हैं। देखते हैं कि बात क्या है।
 
वे नहीं जानते कि वे एक अपूर्व घटना के प्रथम साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने पाया कि आकाश में सिगार के आकार जैसी एक उड़न वस्तु के पिछले भाग के छेद से आग और धुंआ निकल रहा है। एक अल्ट्रालाइट (बहुत हल्के विमान के) पायलट और इतिहास के प्रोफेसर, कार्लोस डि सूजा भी अपनी कार से उसी समय वार्जीन्या की तरफ जा रहे थे। ज़मीन पर गिरने तक वे उस उड़न वस्तु को देखते रहे। सिगार रूपी वह वस्तु डि सूजा को स्कूली बस जितनी बड़ी लगी। कुछ ही समय बाद ब्राज़ील के सैनिकों का एक जत्था और सेना के कई वाहन आदि भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
 
प्रत्यक्षदर्शी को धमकाया : काले सूट-बूट और काले चश्मे पहने, ब्राज़ील की सेना के दो एजेन्ट कार्लोस डि सूजा के पास गए और उनसे कहा कि इस घटना के बारे में आप कभी कुछ नहीं बोलेंगे। बताया जाता है कि डि सूजा ने 25 वर्षों तक मुंह नहीं खोला। मुंह खोला 25 साल बाद बनी एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के लिए। 20 जनवरी, 1996 की इस घाटना के कई अन्य गवाहों का कहना था कि उन्होंने उस सुबह एक अजीब-से प्राणी को कई बार देखा, फ़िल्म भी बनाई, लेकिन सेना के लोगों ने फ़िल्म तुरंत ज़ब्त कर ली।
 
दमकल विभाग से कहा गया कि वह इस प्राणी को ढूंढकर पकड़े। वह मिल गया, पर घायल हो गया लग रहा था। उसे सिर से पैर तक के ताबूत जैसे एक बैग में रखकर वार्जीन्या के स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया। डॉक्टर से कहा गया कि पहले उसका एक्स-रे किया जाए। एक्स-रे होते ही, इससे पहले कि डॉक्टर एक्स-रे के परिणाम को देखता, सैनिकों ने एक्स-रे की तस्वीर ज़ब्त कर ली और चलते बने।
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तीन बहनों ने क्या देखा? : 20 जनवरी,1996 के उस दिन ब्राज़ील के वार्जीन्या शहर में गर्मी अपने यौवन पर थी। पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के देशों में जनवरी में जब कंपकपाती सर्दियों का मौसम होता है, दक्षिणी गोलार्ध के देशों में लोग तब तपतपाती गर्मियों से जूझ रहे होते हैं। दोपहर के लगभग तीन बजे थे। तीन युवा बहनें लिलियन (14 वर्ष), वाल्किरिया (16 वर्ष) और कात्या (22 वर्ष) अपने घर से निकलीं। उन्हें जहां जाना था, वहां पहुंचने का शॉर्टकट लेते हुए जिस रास्ते से वे जा रही थीं, उसकी बगल में कुछ देर बाद उन्हें एक दीवार पर भित्तिचित्र बने दिखे।
 
भित्तिचित्र देखने के दौरान ही उन्होंने यह भी देखा कि किसी मूर्ति जैसी कोई चीज़ उस दीवार से सटी हुई नज़र आ रही है। 10-12 फीट और चलने के बाद इन बहनों ने पाया कि एक छोटा-सा प्राणी, जो बहुत दुर्बल एवं पीड़ित लग रहा था और सिर झुकाए आगे देख रहा था, उसने अचानक गर्दन मोड़ी और उनकी आंखों में आंखें डालकर घूरने लगा। इससे वाल्किरिया और लिलियानी की चीख निकल गई। दोनों डर के मारे भागने लगीं। बड़ी बहन कात्या को वहीं छोड़ दिया। कात्या उस अजीब निरीह प्राणी पर टकटकी लगाए रही। उसकी आंखों से आंखें मिलाकर दूरसंवेदन (टेलीपैथी) द्वारा संवाद का प्रयास करने लगी। वह डरा-सहमा निरीह प्राणी मानो कह रहा था कि मुझे मदद चाहिए।
 
वह एक एलियन था : तीनों बहनों के कहने के अनुसार, चार से पांच फीट लंबे, बिना बालों वाले उस जीव की त्वचा तेल जैसी चिकनी और भूरी थी। वास्तव में वह एक एलियन प्राणी था, कोई स्थानीय आदमी नहीं। न तो इंसान था और न ही जानवर। उल्लेखनीय है कि ब्राज़ील और अमेरिका के आधिकारी, इन बहनों की गवाही को झुठलाने के लिए उस प्राणी को एक ऐसा बेघर फटेहाल आदमी बताते हैं, जो उन्हीं दिनों वार्जीन्या में रहता था। यह भी सुनने में आया कि इन बहनों को पैसे का लालच देकर टेलीविज़न आदि पर यह कहने के लिए बहकाया-फुसलाया गया कि वे झूठ बोल रही थीं।
 
20 जनवरी, 1996 का वह दिन ब्राज़ीलियन सेना के एक पुलिस अधिकारी, मार्को शोरे के लिए भी बहुत घातक सिद्ध हुआ। उसकी कार सड़क पर पड़े एक दूसरे परग्रही को कुचल ही डालती, यदि शोरे ने अंतिम क्षण में उसे देख न लिया होता। शोरे ने एक एंबुलेंस बुलाई, उस प्राणी को हाथों से उठाकर एंबुलेंस में रखा और पास के अस्तपताल में ले गया। यह सब करते समय उसकी एक बांह के नीचे खरोंच आ गई। खरोंच में किसी बैक्टीरिया का संक्रमण हो गया और वह एक फोड़ा बन गया। बैक्टीरिया इतना प्रतिरोधी निकला कि दो डॉक्टर मिलकर भी उसका सफल इलाज़ नहीं कर पाए। कुछ ही दिन बाद ब्राज़ीलियन सेना के इस पुलिस अधिकारी की मृत्यु हो गई।
 
दो परग्रही जीवित बचे थे : ध्वस्त हो गए UFO के जीवित बचे इन दो परग्रही प्राणियों की बेहतर जांच-परख के विचार से उन्हें 'हुमानितास' नाम के एक बड़े अस्पताल में ले जाया गया। उनमें से एक की सांस अभी चल रही थी। किसी संक्रमण को रोकने के लिए अस्पताल की सभी मंजिलों को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया। एक कामचलाऊ प्रयोगशाल बनाकर उसमें जांच करने का निर्णय हुआ। जांच करने वाले डॉक्टर, डॉ. इतालो वेंचेरेती ने बाद में प्रेस के सामने एक वक्तव्य देते हुए कहाः 'मैंने साओ पाउलो में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी की पढ़ाई की है। मैंने 5000 से अधिक सर्जरी की हैं। मैं एक ऐसा अनुभव साझा करना चाहता हूं जो मैंने सचमुच देखा है। मैं एक मरीज़ को देखने गया था और वह मरीज नहीं, बल्कि एक एलियन था। स्पष्ट रूप से एक एलियन। उसकी खोपड़ी आंसू की बूंद के आकार की थी, आंखें भी आंसू की बूंद के आकार की थीं।
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मैं यह सोचकर मरीज़ को देखने गया था कि वह एक इंसान है, और वहां मैंने एक ऐसे अद्भुत प्राणी को देखा जो मेरे लिए एक अनजान दुनिया से आया था। मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या वह पीड़ा में था, लेकिन वह नहीं था। क्या वह सचेत था, तो हां वह था। बहुत शांत, बहुत स्थिर। ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरे मन की हर बात समझ रहा हो। इसे साझा करना अच्छा लगता है, यह समझाना कि हमारी कल्पना से परे भी बहुत सी चीजें हैं। मेरे लिए इसे देखना बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि ब्रह्मांड की विशालता को देखते हुए, ऐसा सिर्फ हमारी इस अद्भुत दुनिया में ही नहीं है। निश्चित रूप से कई अन्य दुनियाएं भी होंगी और वह प्राणी इसका प्रमाण था।'
 
एक दूसरा UFO अपने लोगों को खोजने आया : रात होने के साथ किसी दूसरी दुनिया से आए इन प्राणियों के शरीरों को, वार्जीन्या से करीब 64 किलोमीटर दूर स्थित सेना के बेस पर ले जाया गया। उनके यान के गिरने के समय ही मर गए 3 अभागों सहित 5 शरीरों और उनके यान के कई अवशेषों को, कुछ समय के लिए सेना के बेस पर ही रखा गया। लगभग उसी समय वार्जीन्या के कई निवासियों ने शहर के ऊपर उड़न तश्तरी जैसा एक UFO मंडराने की बात कही।
 
ऐसा लगता था, मानो उसमें बैठे परग्रही वहां हुई दुर्घटना का शिकार बने अपने लोगों को खोज रहे थे। अगली ही सुबह सेना के बेस पर रखे सभी शव वहां से उठाकर साओ पाउलो महानगर के पास के एक ब्राज़ीलियाई वायु सैनिक अड्डे पर पहुंचाए गए। इस तरह के मामलों में अमेरिका और ब्राजील की सरकारें मिलकर काम करती रही हैं। इसी मिलीभगत के कारण वार्जीन्या वाली घटना की ख़बर मिलते ही, ऐसे अवसरों के लिए बनी अमेरिकी टीम के सदस्य आनन-फानन में ब्राज़ीलियाई घटनास्थल पर पहुंच गए थे। परग्रही यान के अधिकांश टुकड़े जमा कर अमेरिका ले जाए गए। अमेरिका के ही एलियन मामलों के खोजी मैक मेव की बात मानें, तो वार्जीन्या UFO दुर्घटना के परग्रही मृतकों के शरीर, अमेरिका के कुख्यात 'एरिया 52' के एक गोपनीय तहखाने में आज भी रखे हुए हैं।
 
तथ्यों, प्रमाणों की अवहेलना : ब्राज़ील के वार्जीन्या में हुई इस अनोखी घटना के बारे में इतने सारे तथ्य, प्रमाण और गवाह होते हुए भी, ब्राज़ील की सेना द्वारा 2010 में की गई एक आधिकारिक जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया कि शहर के एक निवासी को गलती से परग्रही प्राणी समझ लिया गया था। उस क्षेत्र में देखी गई सैन्यकर्मियों की आवाजाही सामान्य थी। अज्ञात उड़न वस्तु (UFO) संबंधी सारी बातें आफ़वाहें और मनगठंत कथाएं हैं। किंतु, लोग तो आज भी यही मानते हैं कि यह इनकार अमेरिका के दबाव का परिणाम है।
 
अमेरिका की अब तक की सारी सरकारें इस तरह की सारी घटनाओं को छिपाती और दबाती रही हैं। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) द्वारा हाल ही में आयोजित एक सुनवाई में अमेरिकी सेनाओं के कुछ सदस्यों तथा कई विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और सांसदों ने भी यूएफ़ओ अवलोकनों को छिपाने, झुठलाने और दबाने की अब तक की नीतियों की खुलकर आलोचना की।

उनका कहना था कि जनता को सब कुछ जानने का अधिकार है, लेकिन झूठ बोला जा रहा है और जनता को अंधेरे में रखा जा रहा है। उन्होंने मांग की UFO और एलियन के अस्तित्व को एक वास्तविकता के तौर पर गंभीरता से लिया जाए। ऐसे अवलोकनों की सारी फ़ाइलें जनहित में सार्वजनिक की जाएं।
 
अंग्रेज़ मूल के अमेरिकी फिल्म निर्माता जेम्स फॉक्स ने 30 वर्ष पूर्व यूएफ़ओ पर अपनी पहली डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाई थी। उन्होंने ब्रज़ील के वार्जीन्या में हुई 1996 की इस अपूर्व घटना पर अब एक नई फ़िल्म बनाई है। यह फिल्म, वार्जीन्या प्रकरण की 30वीं वर्षगँठ के अवसर पर 20 जनवरी, 2026 से अमेरिकी सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।

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