Artemis 2 Mission: अमेरिका 7 दिसंबर, 1972 के अपोलो 17 नाम के अपने अंतिम चंद्र-मिशन के बाद अब एक बार फिर चंद्रमा की तरफ अपने हाथ-पैर बढ़ा रहा है। 10 दिवसीय चंद्र-मिशन 'आर्तेमिस 2' के अंतर्गत पहली बार एक महिला सहित चार अंतरिक्ष यात्रियों ने 1 अप्रैल को केप कैनेवरल, प्लोरिडा में स्थित 'केन्नेडी स्पेस सेंटर' से अपने प्रक्षेपण के एक ही दिन बाद पृथ्वी की परिक्रमा कक्षा छोड़ दी।
ओरॉयन (Orion) नाम के उनके कैप्सूल का इंजन तब लगभग छह मिनट तक चले तीव्र बल के साथ, उन्हें लेकर चंद्रमा की ओर बढ़ चला। अमेरिकी अंतरिक्ष अधिकरण नासा (NASA) के मिशन कंट्रोल के लोगों से बात करते हुए कनाडा के जेरेमी हैनसन ने कहा, 'चंद्रमा की ओर बढ़ रहे अपने मार्ग पर चालक दल बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।...मानवता ने एक बार फिर प्रदर्शित किया है कि हम चाहें को क्या करने में सक्षम हैं।'
हैनसन ने बताया कि जब पृथ्वी पीछे छूटती जा रही थी, तब वे और उनके साथी पायलट, कैप्सूल की खिड़कियों से चिपके हुए थे। उन्होंने अद्भुत नज़ारों का आनंद लिया। उनके चेहरे खिड़कियों से इतना अधिक चिपके हुए थे कि उन्हें बाद में खिड़कियां साफ़ करनी पड़ीं। स्मरणीय है कि पृथ्वी से चंद्रमा की औसत दूरी लगभग 4 लाख किलोमीटर है। 7 दिसंबर, 1972 के अपोलो 17 चंद्र-मिशन के बाद आर्तेमिस 2 पहला समानव चंद्र-मिशन है। इस मिशन का उद्देश्य चालक दल को चंद्रमा की परिक्रमा कराना है; चंद्रमा पर उतरने की कोई योजना नहीं है। 6 अप्रैल को वे चंद्रमा के सुदूर भाग का चक्कर लगाने के साथ पृथ्वी से इतनी दूर चले गए, जितनी दूर कोई मनुष्य अभी तक नहीं गया है।
''आर्तेमिस'' एक यूनानी देवी का नाम है
इस नए अमेरिकी चंद्र अभियान का नाम ''आर्तेमिस'', इसी नाम वाली एक प्रमुख यूनानी (ग्रीक) देवी को समर्पित है। इससे पहले के अमेरिकी चंद्र-निशनों के ''अपोलो (Apollo)'' नाम भी यूनानी देवताओं की याद रहे हैं। आर्तेमिस कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति और भविष्य में मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले मिशनों की तैयारी करना है। आर्तेमिस 1 मिशन के समय, एक मानवरहित अंतरिक्ष यान ने 2022 में चंद्रमा की परिक्रमा की थी। आर्तेमिस 2 का उद्देश्य तीन पुरुषों और एक महिला अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की कक्षा में भेजना रहा है।
आर्तेमिस 2 के बाद का आर्तेमिस 3 मिशन 2027 में होने वाला है, हालांकि कोई चंद्र-यात्री चंद्रमा पर उतरेगा नहीं। वर्तमान योजनाओं के अनुसार, 2028 में आर्तेमिस 4 के साथ चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य रखा गया है। आर्तेमिस 2 नासा का ऐसा पहला चंद्र-मिशन है जिसमें एक महिला, एक अश्वेत पुरुष और कनाडा के जेरेमी हैनसन के रूप में एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री शामिल है। इस समय के ओरॉयन कैप्सूल (यान) की कमान 50 वर्षीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री रीड वाइज़मैन के हाथ में है, जो अमेरिकी नौसेना के एक पूर्व पायलट और परीक्षण पायलट हैं। वे नासा के अंतरिक्ष यात्री विभाग के प्रमुख भी रह चुके हैं।
पहली महिला चंद्रयात्री
अंतरिक्ष यान के पायलट 49 वर्षीय विक्टर ग्लोवर हैं, जो अमेरिकी नौसेना के पूर्व परीक्षण पायलट रहे हैं। वे चंद्र-मिशन में भाग लेने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति हैं। 2013 में नासा द्वारा चुने जाने से पहले, कैलिफोर्निया निवासी और चार बेटियों के पिता ग्लोवर, अमेरिकी सीनेट के कानूनी सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। 47 वर्षीय अमेरिकी महिला इंजीनियर क्रिस्टीना कोच ऐसी पहली महिला हैं, जिनके नाम 328 दिनों के सबसे लंबे अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड है।
2019 में उन्होंने अपनी सहकर्मी जेसिका मीर के साथ पहली बार, सन 2000 से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे 'अंतरराष्ट्रीय अतरिक्ष स्टेशन (ISS)' से महिलाओं द्वारा पूरी तरह से बाहर निकलने के 'स्पेसवाक' में भाग लिया था। 50 वर्षीय पूर्व युद्धक विमान पायलट, कनाडा के जेरेमी हैनसन पहले गैर-अमेरिकी नागरिक हैं। वे 2009 से कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने पृथ्वी और अंतरग्रहीय अंतरिक्ष यान के बीच संपर्क अधिकारी के रूप में कई वर्षों तक कार्य किया है, जिसके बाद उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का दायित्व सौंपा गया।
शौचालय बना समस्या
तकनीकी समस्याओं के कारण हफ्तों की देरी के बाद, आर्तेमिस 2 का प्रक्षेपण काफी सुचारू रूप से संपन्न हुआ। 98 मीटर ऊंचे रॉकेट के द्वारा प्रक्षेपण केवल विशिष्ट समय सीमाओं के भीतर ही संभव था। प्रक्षेपण पहली समय सीमा में ही सफल रहा। प्रक्षेपण के बाद कुछ असामान्य समस्याएं अवश्य उत्पन्न हुईं: ऑनबोर्ड शौचालय कुछ समय के लिए ठीक से काम नहीं कर रहा था। प्रक्षेपण के तुरंत बाद, इंजन में ईंधन भरने की नियोजित प्रक्रिया से पहले, ओरॉयन कैप्सूल के चालक दल ने एक चेतावनी बत्ती को चमकते देखा। नासा के सहायक प्रशासक भारतीय मूल के अमित क्षत्रिय ने बताया, 'शौचालय के नियंत्रण में कुछ समस्या आ गई थी।' इन समस्याओं को किंतु हल कर लिया गया।
अंतरिक्ष कैप्सूल में लगा शौचालय एक तकनीकी नवाचार है : रिपोर्टों के अनुसार, पृथ्वी की कक्षा से परे किसी उड़ान में पहली बार स्थायी रूप से स्थापित शौचालय लगाया गया है। 50 साल से भी पहले के अपोलो मिशनों के दौरान, अंतरिक्ष यात्री अपने मल-मूत्र के लिए बैग का इस्तेमाल करते थे। नई 'सार्वभौमिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली' पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए डिज़ाइन की गई है। एक छोटा-सा दरवाज़ा गोपनीयता प्रदान करता है।
कनाडाई अंतरिक्ष यात्री हैनसन ने एक वीडियो में कहा, 'यह एकमात्र ऐसी जगह है, जहां हम मिशन के दौरान कुछ पल के लिए अकेले होने का एहसास कर सकते हैं।' क्रस्टीना कोच ने 'नेशनल ज्योग्राफिक' के एक वीडियो में बताया कि यह प्रणाली बहुत शोर करती है - चालक दल को इसका उपयोग करते समय कानों को बंद कर लेना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के मिशनों में भी अतीत में शौचालय के साथ कई बार ऐसी ही समस्याएं आई हैं।
उड़ान सीधे चंद्रमा तक पहुंचने की नहीं है
चारों अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा कुल मिलाकर 23 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने की आशा है। अपने सबसे दूर के बिंदु पर, वे पृथ्वी से लगभग 370,000 किलोमीटर और चंद्रमा के सुदूर भाग से लगभग 7,500 किलोमीटर दूर होंगे। उनकी उड़ान सीधे चंद्रमा तक पहुंचने की नहीं है। रॉकेट ने सबसे पहले ओरॉयन कैप्सूल को पृथ्वी की परिक्रमा कक्षा में प्रक्षेपित किया। वहां, चालक दल ने यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न परीक्षण शुरू किए कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा तक पहुंचने की यात्रा के लिए पूर्णतः सक्षम सिद्ध हो।
ओरॉयन कैप्सूल जब चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा होगा और उससे सबसे दूर के हिस्से में होगा, तब लगभग 40 मिनट के लिए पृथ्वी पर के मिशन कंट्रोल से संपर्क टूट जाएगा। चालक दल तब पृथ्वी से अपोलो 13 वाले चंद्र-मिशन के चालक दल से भी अधिक दूर होगा, जिसने पहले यह रिकॉर्ड बनाया था। चंद्रमा की परिक्रमा के दौरान, आर्तेमिस 2 का चालक दल भावी आर्तेमिस 4 मिशन के लिए एक संभावित लैंडिंग (उतरान) स्थल का भी पता लगाएगा। नासा तब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयात्री उतारने की योजना बना रहा है, जहां आज तक कोई आदमी नहीं पहुंचा है।
आर्तेमिस 2 मिशन का उड़ान मार्ग चंद्रमा का दूर का हिस्सा बहुत रोमांचक माना जाता है, क्योंकि वह पास के हिस्से से बिल्कुल अलग दिखता है। पास के हिस्से में गहरे धब्बे हैं, जबकि दूर का हिस्सा अधिक चमकीला है और गड्ढों से ढका हुआ है। वर्तमान चालक दल को चंद्रमा का दूर का पूरा हिस्सा दिखाई देगा। वे प्रथम ऐसे चार लोग होंगे, जो चंद्रमा के दूरवर्ती पूरे हिस्से को एक बार में देखेंगे। पिछले अपोलो मिशन चंद्रमा की परिक्रमा करते समय हमेशा उसके इतने क़रीब होते थे कि उसका केवल एक ही हिस्सा देख पाते थे।
ओरॉयन कैप्सूल लगभग पूर्णत: स्वचालित है। हालांकि, परीक्षण के लिए अंतरिक्ष यात्री समय-समय पर उसे स्वयं भी नियंत्रित करेंगे। उन्हें कई परीक्षणों, सेंसरों और मापों का उपयोग करके सभी प्रणालियों की और अपने स्वास्थ्य की भी लगातार निगरानी करनी है। पृथ्वी और चंद्रमा की तस्वीरें लेना और उनका विश्लेषण करना है। इसके अलावा, उन्हें कैप्सूल (यान) के भीतर के बहुत सीमित स्थान में ही रहना और काम करना है। वे कैप्सूल की दीवार से जुड़े स्लीपिंग बैग में सोते हैं। तरल साबुन, वॉशक्लॉथ, टूथब्रश और टूथपेस्ट जैसी चीजों से अपने आप को साफ कर सकते हैं। भोजन गर्म करने वाले यंत्र की क्षमता सीमित होने से, भोजन कैप्सूल के भीतर के कम तापमान पर ही खाना पड़ता है। अंतरिक्ष यात्रियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करेंगे। उनके पास टैबलेट और लैपटॉप भी हैं, जिनके माध्यम से वे वाई-फाई द्वारा पृथ्वी से संपर्क कर सकते हैं।
पृथ्वी पर जोखिम भरी वापसी
पृथ्वी पर वापसी की उड़ान एक तथाकथित ''मुक्त वापसी प्रक्षेपवक्र'' के माध्यम से होगी, जिसमें अंतरिक्ष यान को केवल चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण द्वारा और बिना किसी अतिरिक्त प्रणोदन के पृथ्वी की दिशा वाले मार्ग पर वापस लाया जाएगा। तीन से चार दिनों के बाद, पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश होगा, जो पूरे मिशन के सबसे खतरनाक क्षणों में से एक होगा। चंद्र-कक्षा के पूर्वाभ्यास के दौरान, मानवरहित आर्तेमिस 1 मिशन में, पृथ्वी पर वापसी के दौरान अप्रत्याशित समस्याएं उत्पन्न हुई थीं: पृथ्वी के घने वायुमंडल के साथ घर्षण के कारण अंतरिक्ष यान के निरंतर बढ़ते तापमान से उसकी रक्षक ढाल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।
नासा ने अब आर्तेमिस 2 के कैप्सूल पर कम से कम दबाव पड़ने के लिए प्रक्षेपमार्ग को नए सिरे से समायोजित किया है। पृथ्वी के घने वायुमंडल में पुनः प्रवेश के बाद, अंतरिक्ष यान के समान कैप्सूल को पैराशूट द्वारा और धीमा किया जाएगा और वह कैलिफोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर पर उतरेगा। इस अभियान पर खर्च कितना होगा? 2021 में, नासा के तत्कालीन महानिरीक्षक ने अनुमान लगाया था कि आर्तेमिस कार्यक्रम की लागत 2025 तक 86 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगी, जो शुरू में अनुमानित लागत से कहीं अधिक है।
लागत लगभग चार अरब डॉलर है
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अकेले आर्तेमिस 2 की लागत लगभग चार अरब डॉलर है। अपोलो कार्यक्रम की कुल लागत लगभग 28 अरब डॉलर थी, जो आज के हिसाब से लगभग 280 अरब डॉलर होगी। क्या अमेरिकी चंद्र मिशन का कोई राजनीतिक पहलू भी है? रणनीतिक रूप से देखें, तो चंद्रमा पर वापसी, अंतरिक्ष दौड़ में तकनीकी और भू-राजनीतिक नेतृत्व का प्रतीक है। वहां स्थायी उपस्थिति को अंतरिक्ष अन्वेषण में राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आकार देने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है।
नासा द्वारा बाद में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का इरादा एक प्रबल भू-राजनीतिक संकेत भी है। अमेरिका के दृष्टिकोण से लक्ष्य है, जल्द से जल्द स्थायी रूप से चंद्रमा पर वापस लौटना और चीन से पहले वहां पहुंचना। चीन का भी एक चंद्र अभियान कार्यक्रम है; ऐसा माना जाता है कि चीन 2030 में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजेगा। अमेरिकी उससे पहले ही वहां पहुंचना चाहते हैं; 2028 के आस-पास तक।
कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं
नासा अकेले आर्तेमिस कार्यक्रम का प्रबंधन नहीं कर रहा है। अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी कई निजी कंपनियां भी इसमें शामिल हैं, जिनमें अमेज़न के ज़ेफ बेजोस द्वारा स्थापित 'ब्लू ऑरिजिन' और तकनीकी अरबपति एलोन मस्क द्वारा स्थापित 'स्पेसएक्स' बड़े नाम हैं। कई अंतरराष्ट्रीय साझेदार भी हैं-- मुख्य रूप से कनाडा, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ओरॉयन अंतरिक्ष कैप्सूल में जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) के चार विकिरण डिटेक्टर लगे हैं।
जर्मनी के ब्रेमेन शहर में निर्मित यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल (ESM) का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसमें चंद्रमा तक पहुंचने के लिए मुख्य इंजन, तापमान नियंत्रण और बिजली आपूर्ति तकनीक, साथ ही ईंधन, ऑक्सीजन और पानी की आपूर्ति भी शामिल है। बर्लिन स्थित एक स्टार्टअप 'न्यूरोस्पेस' द्वारा विकसित एक लघु उपग्रह 'टैचेल्स' भी इसमें शामिल है; वह चंद्र कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष विकिरण पर डेटा एकत्रित करेगा। तो क्या जल्द ही कोई जर्मन अंतरिक्ष यात्री भी भावी मिशन में शामिल होगा? इसकी संभावना काफी अधिक बताई जा रही है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के महानिदेशक योसेफ़ एशबैकर ने हाल ही में घोषणा की है कि जर्मनी, चंद्र-मिशनों के लिए ईएसए के अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने वाला पहला देश होगा। हालांकि कि कोई नाम और समय अभी तय नहीं है।