Publish Date: Mon, 02 Mar 2026 (17:09 IST)
Updated Date: Mon, 02 Mar 2026 (17:31 IST)
इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध का आज तीसरा दिन है। अमेरिका ने बताया कि कुवैत ने उसके 3 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स को गिरा दिया है। UN परमाणु एजेंसी (IAEA) में ईरान के राजदूत के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में ईरान की नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह एक न्यूक्लियर सेंटर है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी रहती है।
मध्य पूर्व और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में जारी सैन्य हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। एजेंसी ने कहा है कि वह अपने जनादेश के अनुरूप संभावित रेडियोलॉजिकल आपात स्थितियों पर नजर रखे हुए है, जो सैन्य अभियानों से उत्पन्न हो सकती हैं।
IAEA ने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी संभावित रेडियोलॉजिकल रिसाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ तो बड़े शहरों जितने या उससे अधिक क्षेत्रों को खाली कराना पड़ सकता है।
परमाणु प्रतिष्ठानों पर नहीं होने चाहिए हमले
आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने आश्वासन दिया कि वह सदस्य देशों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखे हुए है और यदि परमाणु सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक होती है तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है। एजेंसी प्रमुख ने अपने बयान में दोहराया कि IAEA के उद्देश्यों के अनुरूप सभी पक्षों को आगे बढ़ने से बचना चाहिए।
निष्पक्ष सलाह को भी नहीं माना ईरान
आईएईए के महानिदेशक दिलाया कि IAEA की जनरल कॉन्फ्रेंस के पूर्व प्रस्तावों में स्पष्ट कहा गया है कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर सशस्त्र हमले कभी नहीं होने चाहिए। ऐसे हमलों से रेडियोधर्मी रिसाव हो सकता है, जिसके गंभीर परिणाम संबंधित देश की सीमाओं से बाहर तक फैल सकते हैं। IAEA प्रमुख ने बताया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जिनेवा में हालिया वार्ताओं में तकनीकी और निष्पक्ष सलाह भी दी थी। हालांकि इस बार कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे निराशा की भावना स्वाभाविक है।
क्या अभी तक रेडिएशन हुआ
IAEA का Incident and Emergency Centre (IEC) पूरी तरह सक्रिय है। एक विशेष टीम लगातार सूचनाएं एकत्र कर स्थिति का आकलन कर रही है। हालांकि, जारी संघर्ष के कारण संचार व्यवस्था में बाधाएं भी सामने आ रही हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क को अलर्ट पर रखा गया है और वह एजेंसी के साथ निरंतर संपर्क में है। फिलहाल ईरान की सीमा से लगे देशों में सामान्य पृष्ठभूमि स्तर से अधिक रेडिएशन दर्ज नहीं किया गया है। Edited by : Sudhir Sharma