रेडिएशन हमेशा से ही हानिकारक माने जाते हैं, लेकिन सभी रेडिएशन हानिकारक हों यह ज़रूरी नहीं। कुछ रेडिएशन ऐसे भी हैं, जो खाद्य पदार्थों को ज़्यादा दिनों के लिए सुरक्षित रखने के लिए उपयोग में आते हैं।
खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए जिस प्रणाली का उपयोग होता है उसे ‘फूड इरेडिएश न ’ कहा जाता है। इस प्रणाली में खाद्य पदार्थों को आयोनाइज़िंग रेडिएशन के सामने रख दिया जाता है, जिससे उसमें मौजूद सभी वायरस, कीटाणु और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।
सिर्फ खाद्य पदार्थ ही नहीं, बहुत सी वस्तुओं को इस प्रणाली की मदद से आयोनाइज़ किया जाता है जैसे- चिकित्सा संबंधी उपकरण, प्लास्टिक, गैस पाइप लाइन में उपयोग होने वाली नली आदि।
रेडिएशन हमेशा से ही हानिकारक माने जाते हैं, लेकिन सभी रेडिएशन हानिकारक हों यह ज़रूरी नहीं। कुछ रेडिएशन ऐसे भी हैं, जो..
खाद्य पदार्थ के इस प्रक्रिया से गुज़रने के बाद उसमें मौजूद जीवाणुओं के डीएनए नष्ट हो जाते हैं और इसी वजह से वे दोबारा पनप नहीं पाते । इस तरह की प्रक्रिया का प्रयोग करने के पीछे एक और कारण है। इसमें पदार्थ में मौजूद कणों को विभाजित करके उनके बीच में रेडिएशन को पहुँचाया जाता है। इसलिए इस प्रणाली का नाम ‘फूड इरेडिएश न ’ रखा गया है ।
यह प्रणाली अब तक 40 देशों में अपना ली गई है। इस प्रणाली पर होने वाला खर्च, खाद्य पदार्थ पर होने वाले आयोनाइज़ेशन की मात्रा पर निर्भर करता है।
अमेरिका और दूसरे कई देशों में इस तरह की प्रणाली से सुरक्षित किए गए पदार्थों पर ‘ट्रीटेड विद इरेडिएश न ’ नामक लेबल लगाया जाता है।