Hanuman Chalisa

आपने कहीं नहीं पढ़ी होगी चौथ माता की यह पौराणिक कहानी

Webdunia
एक सेठ-सेठानी थे। उनके एक बेटा और बहू थे। बहू सबको भोजन कराके फिर स्वयं भोजन करती। एक पड़ोसन ऐसी भी थी, जो रोज पूछती कि बहू आज क्या बनाया-खाया है? बहू कहती- ठंडो बासी। एक दिन उसके पति ने ऐेसा सुनकर विचार किया कि आज तो पकवान बनाए जाएं, फिर देखें कि मेरी पत्नी क्या कहती है?

उसने तरह-तरह के पकवान बनवाए और घर के सभी लोगों ने एकसाथ बैठकर भोजन किया। आज भी पड़ोसन ने पूछा तो बहू ने कहा ठंडो बासी। सेठ के लड़के ने सोचा, हो न हो कोई बात अवश्य है जिससे कि मेरी पत्नी ऐसा कहती है। उसने पत्नी से पूछा- तुम रोज 'ठंडो बासी खाया' ऐसा क्यों कहती हो, ज‍बकि अपन सबने एकसाथ बैठकर कई तरह के पकवान खाए? उसकी पत्नी बोली- अपन जो खा रहे हैं, वह बाप-बूढ़ों की कमाई है जिस दिन आप कमाकर लाओगे, उस दिन मैं समझूंगी कि ताजा भोजन कर रहे हैं। 
 
अब एक दिन लड़के ने मां से कहा- मैं एक बड़े शहर में कमाई करने जा रहा हूं। मां बोली- बेटा, अपने पास इतना धन है कि 'खाया नहीं खुटेगा'। मां के मना करने पर भी बेटे ने स्वयं कमाने का दृढ़ निश्चय कर लिया और जाते समय पत्नी से कहा- 'मैं जब तक कमाकर बहुत-सा धन लेकर न आऊं, तुम चूल्हे की आग मत बुझने देना।' 
 
एक दिन चूल्हे की आग बुझ गई तो वह मन ही मन घबराने लगी- कहीं मेरे पति पर संकट तो नहीं आन पड़ा। जल्दी से पड़ोस में से आग लाकर चूल्हे में रख दूं, ऐसा विचार करके पड़ोस में गई। वहां पड़ोसन चौथ माता का व्रत-पूजन कर रही थी। पड़ोसन ने कहा- 'थोड़ी देर में आकर ले जाना।' बहू ने पड़ोसन से पूछा- आप यह व्रत क्यों करती हैं? इससे क्या मिलता है? पड़ोसन ने कहा- चौथ माता के इस व्रत को करने से अन्न-लक्ष्मी मिले और अपनी मनोकामना पूरी हो।
 
अब बहू भी 'चौथ माता' का व्रत करने लगी। दीवार पर चौथमाता बनाई। उस दिन घी-गुड़ का चूरमा बनाकर रात्रि को चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करती। ऐसा करते-करते बहुत दिन हो गए। चौथमाता ने उस बहू के पति को सपना दिया कि 'साहूकार का बेटा, तू जागे कि सोवे। तेरी पत्नी बहुत याद कर रही है, घर जाकर उसकी चिंता मिटा। तू दुकान खोलकर कंकू केशर का पगल्या बनाके बैठ जाना। आज तेरा हिसाब-किताब चुकता हो जाएगा।' अब तो चौथमाता ने जैसा कहा था, वैसा ही हुआ। उसने घर जाने की तैयारी की और गाड़ी भर के धन-दौलत लेकर चल दिया। रास्ते में एक बड़ा-सा काला नाग फल फैलाए बैठ गया और कहने गला- आज तो मैं तुझे डसूंगा, छोड़ंगा नहीं। आज तेरी आयु पूरी हो गई है। सेठ ने लड़के से कहा- आज चौथमाता ने मुझे सपना दिया तो मैं पत्नी से मिलने घर जा रहा हूं, वहां मेरी पत्नी बहुत चिंता कर रही है। मैं उससे मिलकर जरूर आऊंगा, तब तुम मुझे डस लेना। नाग ने कहा- तुम शपथपूर्वक कहकर जाओ तो मैं तुम्हें जाने दूंगा, परंतु लौटकर नहीं आए तो तुम्हारे घर आकर मैं तुम्हें डस लूंगा।
 
इस प्रकार सर्प को वचन देकर वह अपने घर पहुंचा। वहां सभी से हंसी-खुशी से मिला और भोजन करने उदास होकर बैठ गया। उसकी पत्नी ने उदास होने का कारण पूछा तो पति ने 'काले नाग' वाली बात बताते हुए कहा- यदि मैं उसके पास नहीं जाऊंगा, तो वह घर आकर ही मुझे डस लेगा। पत्नी बहुत चतुर थी। उसने कहा कि आप घबराओ नहीं, लेट जाओ, मैं एक उपाय करती हूं। पत्नी ने कमरे की 7 पेढ़ी (सिड़ाव) धोई। पहली पेढ़ी पर रेत, दूसरी पर इत्र, तीसरी पर गुलाल, फूल, चौथी पर कंकू-केशर, पांचवीं पर लड्डू-पेड़ा, छठी पर गादी-गलीचा और सातवीं पेढ़ी पर दूध का कटोरा भरकर रख दिए। इस प्रकार वह 7 ही पेढ़ी सजाकर बैठ गई। 
 
आधी रात होते ही नाग आकर पेढ़ी चढ़ने लगा। पहली पेढ़ी पर रेत में लोट गया और कहने लगा कि सेठ की बहू ने आराम तो बहुत दिया, पर वचनों से बंधकर आया हूं, सो डसूंगा अवश्य ही। इसी प्रकार सातों पेढ़ियों पर नाग आराम करता हुआ और कहता हुआ कि 'डसूंगा जरूर' कमरे में जाने ही वाला था कि चौथ माता ने विचार किया कि मैं इसे नहीं बचाऊंगी तो संसार में धरम-करम और व्रत-पूजन को कौन मानेगा? अब तो गणेशजी, चंद्रमाजी और चौथमाता ने उसे बचाने का विचार किया। चंद्रमाजी ने उजाला किया, चौथमाता ढाल बनी और गणेशजी ने तलवार लेकर नाग को मार दिया और ढाल से ढंक दिया।
 
अब बहू भी थकी-हारी सो गई। दिन उगा तो लोग बेटे से मिलने आए, परंतु बेटा-बहू तो उठे ही नहीं थे। बहुत देर हो गई तो मां उन्हें उठाने गई। मां ने सातों पेढ़ियों पर जो कुछ देखा तो बहुत घबराई और बेटा-बहू को आवाज लगाई। बेटा-बहू उठे तो देखा कि एक ढाल-तलवार वहां पड़ी है। अब ढाल उठाई तो वही काला नाग मरा हुआ पड़ा है। बेटा-बहू ने सोचा कि आज तो धरम-करम ही आड़े आए, जो भगवान गणेशजी और चौथमाता ने अपनी रक्षा की। हे चौथमाता! आपने जैसी सेठ के बेटे-बहू की रक्षा की, वैसी सबकी रक्षा कीजो। 
 
बोलो चौथमाता की जय।
 
साभार- बारह महीने की व्रत-कथाएं

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ माह की अमावस्या का क्या है महत्व, जानिए पौराणिक कथा

Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष का व्रत रखने का महत्व और विधि

Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (13 मई, 2026)

13 May Birthday: आपको 13 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

अगला लेख