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Karwa Chauth 2024: करवा चौथ पर बहू सास को और सास बहू को क्या देती हैं?

WD Feature Desk
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024 (12:19 IST)
karwa chauth par bahu ko kya karna chahiye: हिंदू महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सेहत के लिए कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 रविवार के दिन रखा जाएगा। चांद देखकर ही व्रत का परायण किया जाता है। इस व्रत के दौरान बहू अपनी सास को करवा, मीठे पकवान, कपड़े आदि देती हैं जबकि सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। जानते हैं कि ये क्या होते हैं।
बहू सास एक दूसरे को देती हैं करवा:
जब बहू व्रत शुरू करती है, तो सास उसे करवा देती है, उसी तरह बहू भी सास को करवा देती है। पूजा करते समय और कथा सुनते समय दो करवे रखने होते हैं- एक वो जिससे महिलाएं अर्घ्य देती हैं यानी जिसे उनकी सास ने दिया होता है और दूसरा वो जिसमें पानी भरकर बायना देते समय उनकी सास को देती हैं। सास उस पानी को किसी पौधे में डाल देती हैं और अपने पानी वाले लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
 
करवा चौथ पर सास को बहुएं क्या देती हैं?
करवा चौथ पर महिलाएं व्रत खोलने के बाद अपनी सास को करवा, मीठे पकवान, कपड़े और सुहाग और श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं देती हैं जिसे बायना भी कहा जाता है।
 
करवा चौथ पर बहुओं को सास क्या देती हैं?  
इस दिन सास अपनी बहुओं को सूर्योदय से पहले सरगी की थाल देती हैं। इस थाल में मिठाई, मठरी, मेवे, फल, कपड़े, गहने, पूरी और सेवई आदि चीजें होती हैं। इससे खाकर ही बहुए निर्जला व्रत प्रारंभ करती हैं और बाद में इससे ही चांद देखने के बाद व्रत खोलती हैं।
क्या होता है करवा?
करवा मिट्टी का एक बर्तन होता है। काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी की वस्तु को करवा कहते हैं। कुछ लोग तांबे के बने करवे लाते हैं। इस तरह दो करवे बनाए जाते हैं। करवा में रक्षासूत्र बांधकर, हल्दी और आटे के सम्मिश्रण से एक स्वस्तिक बनाते हैं। एक करवे में जल तथा दूसरे करवे में दूध भरते हैं और इसमें ताम्बे या चांदी का सिक्का डालते हैं।
 
क्या होती है सरगी?
यह रस्म अक्सर पंजाब प्रांत में मनाई जाती है। कोई भी महिला जब करवा चौथ का व्रत रखती है तो उसकी सास उसे सरगी बनाकर देती है। सरगी एक भोजन की थाली है जिसमें खाने की कुछ चीजें होती हैं। जिसके बाद दिनभर निर्जला रहा जाता है और फिर रात में चांद की पूजा करने के बाद ही खाया जाता है। चूंकि सरगी को खाकर व्रत की शुरुआत की जाती है इसलिए सरगी की थाली में ऐसी चीजें होती है जिसे खाने से भूख और प्यास कम लगती है और दिनभर एनर्जी बनी रहती। इसमें अक्सर सूखे मेवे और फल होते हैं।
 
सास द्वारा दी हुई सरगी से बहू अपने व्रत की शुरुआत करती है। अगर सास साथ में नहीं हैं, तो वो बहू को पैसे भिजवा सकती हैं, ताकि वो अपने लिए सारा सामान खरीद सके। इस सरगी में कपड़े, सुहाग की चीजे, फेनिया, फ्रूट, ड्राईफ्रूट, नारियल आदि रखे होते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश और बिहार में इस त्योहार को मनाने का तरीका अलग है।

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