Girl Child poem : मम्मी मैं भी बड़ी हो गई। घिसट रही थी घुटनों के बल, लेकिन अब मैं खड़ी हो गई। मम्मी मैं भी बड़ी हो गई। सरक-सरक कर इस कोने से, उस कोने पहुंची कई बार। पता नहीं कमरे का चक्कर, लगा आई मैं कितने बार। छूट गया...