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चुलबुली कविता : चिड़ा-चिड़ी का जीवन

कृष्ण वल्लभ पौराणिक
एक घोंसला उन्हें बनाना
दौड़-दौड़ तिनकों को लाना
चिड़ा-चिड़ी का काम पुराना
फिर अंडे उसमें बैठाना ...1
एक-एक कर अंदर जमाना
उन पर बैठ उन्हें गर्माना
जब लगता चूजे का आना
बाहर आकर शोर मचाना ...2
 
अब चूजे की भूख भगाना
चोंच दबा दाने को लाना
खुली चोंच में उसे खिलाना
मन होता उनका दीवाना ...3
 
बच्चों को दुनिया दिखलाना
चहक-चहक बाहर बुलवाना
फुदक-फुदक उड़ना सिखलाना
जब उड़ जावे उसे भुलाना ...4 
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