पूरब की खिड़की से झांका, नन्हा बालक भोला भाला। अरे-अरे यह तो सूरज है, आया ओढ़े लाल दुशाला। हवा चल पड़ी ठंडी-ठंडी, डाली फूलों को दुलरातीं। नदियों, झरनों, तालाबों के, नीले जल पर चंवर ढुलाती। किरणों के घोड़े पर बैठी, धूप आ गई मस्ती करती। अलसाए प्राणी पौधों...