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बाल गीत : रोटी कहां छुपाई

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव

Roti poem

रोटी कहां छुपाई
लगे देखने टेलीविजन,
चूहे घर के सारे।
देख रोटियां परदे पर,
उछले खुशियों के मारे।
 
सोच रहे थे एक झपट्टे,
में रोटी लें बीन।
लेकिन बिजली बंद हुई तो,
रोटी हुई विलीन।
 
लिए कई फेरे टीवी के,
बड़ा गजब है भाई।
बिजली बंद हुई, टीवी ने
रोटी कहां छुपाई?

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

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