suvichar

बाल गीत : जीत के परचम...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
मन को लुभा रहे हैं, 
ये फूल गुलमोहर के।
 
ये लाल-लाल लुच-लुच, 
डालों पे डोलते हैं।
कुछ ध्यान से सुनो तो, 
शायद ये बोलते हैं।
सब लोग इन्हें देखें, 
रुक-रुक, ठहर-ठहर के। 
 
चुन्ना ने एक अंगुली, 
उस ओर है उठाई। 
देखा जो गुलमोहर तो, 
चिन्नी भी खिलखिलाई। 
मस्ती में धूल चूमें, 
नीचे बिखर-बिखर के।
 
हंसते हैं मुस्कुराते, 
ये सूर्य को चिढ़ाते।
आनंद का अंगूठा, 
ये धूप को दिखाते।
हैं जीत के ये परचम, 
उड़ते फहर-फहर के।
 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

नमक, थोड़ा ही सही पर हर जगह जरूरी

होली पर लघुकथा: स्मृति के रंग

Holi Essay: होलाष्टक, होलिका दहन और धुलेंड़ी पर हिन्दी में रोचक निबंध

चेहरा पड़ गया है काला और बेजान? सर्दियों में त्वचा को मखमल जैसा कोमल बनाएंगे ये 6 जादुई टिप्स

महंगे सप्लीमेंट्स छोड़ें! किचन में छिपे हैं ये 5 'सुपरफूड्स', जो शरीर को बनाएंगे लोहे जैसा मजबूत

सभी देखें

नवीनतम

शक्ति के बिना अधूरे हैं शक्तिमान: नारी शक्ति के 8 स्वर्णिम प्रमाण

PM मोदी के इजरायल दौरे में भारत की रक्षा नीति में बड़े बदलाव के संकेत , भारत को हथियार नहीं, तकनीक चाहिए

Chandra Shekhar Azad: आजाद शहीद दिवस, जानें महान क्रांतिकारी के बारे में 10 अनसुने तथ्य

नास्तिकता बस एक मिथ्या भाव है

Holi Thandai: ऐसे बनाएं होली पर भांग की ठंडाई, त्योहार का आनंद हो जाएगा दोगुना

अगला लेख