Dharma Sangrah

कविता : जुलाई का महीना

Webdunia
- घमंडीलाल अग्रवाल
 

 
मई-जून की घूब घुमाई-
लो, फिर से आ गई जुलाई।
 
खुलने को है अपनी शाला,
रंग जमेगा शिक्षा वाला,
कानों में स्वर पड़े सुनाई। 
 
नए दोस्तों से मिलना है,
फूलों के जैसा खिलना है,
शिक्षक आए, राम दुहाई। 
 
पढ़ने‍-लिखने से क्या डरना,
काम समय पर अपना करना,
आएगी फिर नहीं रुलाई।
 
डाल हाथ में हाथ बढ़ेंगे,
जीवन का वह लक्ष्य पढ़ेंगे,
छोड़-छाड़ प्रत्येक बुराई। 
 
साभार- देवपुत्र 
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