शाम हुई थका सूरज पहाड़ों की ओट में करता विश्राम। गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े पंछियों के कोलाहल से नींद कहां से आए। हुआ सवेरा नहाकर निकला हो नदी से पंछी खोजते दाना-पानी सूरज के उदय की दिशा में। सूर्य घड़ी प्रकाश बिना सूनी जल का...