पुस्तक और किताबें महंगी। जूते और जुराबें महंगी। शाला के परिधान कीमती। शिक्षा का सामान कीमती लूटपाट इतनी ज्यादा है। कहीं नहीं अब बचे उसूल। टयूशन फीस हुई मनमानी। पैसों की ही खींचातानी। निर्धन अब क्या करें बेचारे। उनको देता कौन सहारे। बड़े-बड़े स्कूल खुले हैं, धनपतियों के ही...