सूरज को संदेशा दो मां, ठीक नहीं है गाल फुलाना। बिना बात के लाल टमाटर, बनकर लाल-लाल हो जाना। खुद तपते हो हमें तपाते। बेमतलब ही हमें सताते। गाल फुलाकर रखे आपने, न हंसते न मुस्करा पाते। ऐसे में उम्मीद कहां है, तुम से कुछ भी राहत पाना।...