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कहानी : ताजपुर जंगल में आतंकी

Webdunia
-राजेश मेहरा


 
ताजपुर जंगल में शाम का समय था। हल्की-हल्की सर्द हवा बह रही थी। आसमान में बादल थे। ऐसा लग रहा था, जैसे बरसात होगी। सब जानवर अपना खाना खाकर तेजी से अपने-अपने घरों की तरफ जा रहे थे। 
 
बीनू बाज भी आसमान के रास्ते अपने घोंसले की तरफ जा रहा था। आज वह अपने घोंसले से बहुत दूर आ गया था इसलिए वह जल्दी से उड़कर अपने घर पहुंचना चाहता था। अचानक उसकी निगाह नीचे एक पहाड़ी की ओट में पड़ी। उसने देखा कि चार भेड़िये अपने मुंह पर कपड़ा बांधे और अपने आपको दूसरे जानवरों से बचाते व छुपाते हुए ताजपुर के जंगल की तरफ बढ़ रहे थे। 
 
बीनू बाज को उनकी इस हरकत पर कुछ शक हुआ। उसने एक बार तो सोचा कि मरने दो मुझे क्या? लेकिन उसने सुन रखा था कि उसके जंगल पर आने वाले नए साल के मौके पर कुछ आतंकी हमला कर सकते हैं, तो उसने उन चारों भेड़ियों की हरकत के बारे में पता लगाने का निश्चय किया।
 
वह धीरे से नीचे आया और एक पेड़ पर छुपकर बैठ गया। अब बीनू बाज तो उन चारों भेड़ियों को देख सकता था लेकिन वो चारों उसको नहीं देख सकते थे। वो चारों भेड़िये भी उसी पेड़ के नीचे आकर बैठ गए। काले बादलों की वजह से अंधेरा होने लगा था।
 
चारों भेड़ियों में से एक बोला- बस अब थोड़ी देर की बात है, जब ताजपुर जंगल के सब जानवर सो जाएंगे और फिर हम उन पर हमला कर देंगे। 
 
दूसरा बोला- हां, सब अपने-अपने हथियार चेक कर लो। इतना कहने पर सबने अपने थैलों में छिपाई हुई आधुनिक बंदूक को निकालकर देखा और सबने एकसाथ कहा- सब ठीक है। 
 
अब बीनू बाज भी घबरा गया और उसका शक ठीक था। अब उसने सोचा कि सब जंगल वालों को इसके बारे में बताना चाहिए जिससे कि वो अपने बचाव में कुछ कर सकें। वह तुरंत धीरे से उस पेड़ से उड़ा और अपने ताजपुर जंगल के द्वार पर पंहुचा। डर और घबराहट से वह पसीने पसीने हो रहा था। 
 
उसको इस हालत में देखकर खेमू खरगोश बोला- अरे बीनू इतना घबराए और बदहवास से कहां भागे जा रहे हो? 
 
इतना सुनकर बीनू बाज रुका और नीचे आकर खेमू खरगोश के पास बैठ गया। उसने जल्दी से उन आतंकी भेड़ियों की बात उसे बताई। अब खेमू खरगोश भी परेशान हो गया और काफी घबरा गया। 
 
बीनू बाज जाने लगा और बोला- मुझे सारे जंगलवासियों को बताना पड़ेगा।
 
इतना सुनकर खेमू खरगोश बोला- बीनू यदि तुम ये बात सारे जंगल को बताओगे तो सारे जंगलवासी घबरा जाएंगे तथा जंगल में ज्यादा हलचल और भगदड़ मच जाएगी। इसे देखकर हो सकता है कि वो भेड़िये आज हमला ना करके फिर कभी करें और हो सकता है कि अगली बार हमें ना पता लगे कि वो कब हमला करेंगे इसलिए उन्हें हमें आज ही पकड़ना पड़ेगा और अपने जंगल को भी बचाना पड़ेगा। बीनू बाज को खेमू खरगोश की बात में दम लग रहा था। 
 
वह थोड़ी देर चुप होकर बोला- फिर हम दोनों कैसे अकेले अपने जंगल को बचाएं? 
 
खेमू खरगोश बोला- हम दोनों ये नहीं कर सकते इसलिए हमें और साथी लेने पड़ेंगे, हमारे पास समय है। वो लोग सबके सो जाने पर ही हमला करेंगे। अब हल्की बरसात शुरू हो चुकी थी। 
 
इतने में खेमू खरगोश बोला- मुझे एक तरकीब सूझी है, तुम मेरे पीछे आओ।
 
खेमू खरगोश और बीनू बाज जल्दी से ताजपुर जंगल के सेनापति चीनासिंह चीता के पास पहुंचे और उन्हें सारी बातें जल्दी-जल्दी बताईं। वो उनकी इस बात से सहमत थे कि उन्हें हमें आज ही और बिना किसी शोर-शराबे के पकड़ना पड़ेगा।
 
तभी खेमू खरगोश ने उन भेड़ियों को पकड़ने की एक योजना बताई तो वो खुश हुए। 
 
सेनापति बोला- हां, ये ठीक रहेगा। इससे हम उनको बिना किसी शोर-शराबे के पकड़ सकेंगे। 
 
वो तीनों मिलकर अजगर भाइयों के पास पहुंचे और उनको भी सारी बातें बताईं तो वो भी झट से उनके साथ चलने को तैयार हो गए। वो सब मिलकर जुगनू के मोहल्ले में पहुंचे और उनको भी बात बताकर अपने साथ ले लिया। वो सब भी सहायता को तैयार हो गए और उनके साथ चल दिए।
 
अब सब मिलकर बीनू बाज के पीछे उन छुपे भेड़िये आतंकियों के ठिकाने की तरफ चल दिए। जब वो सब उन आतंकियों के पास पहुंच गए तो बीनू ने उन्हें रुकने का इशारा किया। अंधेरा काफी हो गया था और अब बरसात भी तेज थी लेकिन उन सबको दिख रहा था कि वो आतंकी वहीं छिपे हुए हैं।
 
अब सेनापति चीनासिंह चीता ने कहा- अब हमें अपनी योजना पर काम करना है। बीनू तुम अपनी चोंच में उठाकर इन अजगर भाइयों को पेड़ की डाल पर ठीक उन आतंकियों के सिर के ऊपर बैठाकर आओ। 
 
सेनापति ने अजगर भाइयों को कहा कि जैसे ही ये सब जुगनू पेड़ से एकसाथ तेज रोशनी करें, तो तुम उन चारों भेड़ियों पर पेड़ पर से हमला करके दबोच लेना और उसके बाद मैं और खेमू उनको जाल डालकर कैद कर लेंगे। उन चारों ने सहमति से सिर हिलाया। 
 
बीनू ने वैसा ही किया और एक-एक करके उन चारों अजगर भाइयों को डाल पर अपनी चोंच से ले जाकर बैठा दिया था और उन आतंकियों को अहसास भी नहीं हुआ। उसके बाद खेमू खरगोश ने जुगनू के दल की तरफ इशारा किया तो वो लोग पेड़ के ऊपर झुंड में खड़े हो गए। 
 
जैसे ही खेमू खरगोश ने मुंह से आवाज निकाली तो तुरंत जुगनू चमकाने लगे और इतनी रोशनी हो गई‍ कि वो आतंकी साफ दिखने लगे।
 
तुरंत ही चारों अजगर पेड़ से एक-एक करके उन पर झपटे। इससे पहले कि वो कुछ समझ पाते, खेमू खरगोश और सेनापति चीनासिंह चीता ने उन्हें जाल में पकड़कर कैद कर लिया और झटपट बीनू बाज ने उनके हथियार छीन लिए। वो अब पूरी तरह से कैद में थे। उनको पकड़कर उसी समय जंगल के राजा शेरसिंह के सामने पेश किया गया। 
 
सेनापति ने सारी बात विस्तार से राजा को बताई और ये भी बताई कि इसके बारे में पहले आपको क्यों नहीं बताया गया था ताकि ज्यादा शोर-शराबा न हो और ये आतंकी भेड़िये सतर्क होकर भाग ना जाएं। 
 
राजा ने खेमू खरगोश, बीनू बाज, अजगर भाइयों और जुगनू भाइयों को उनकी बहादुरी का इनाम दिया और उन आतंकियों को कैद में डाल दिया।
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