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बीथोवन का पत्र

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विश्‍व के प्रसिद्ध संगीतकारों में से एक बीथोवन जहाँ अपने संगीत के लिए ख्‍यात थे, वहीं उनका जीवन रहस्‍यों से भरा हुआ था, यहाँ तक कि उनकी मौत भी। बीथोवन आजीवन अविवाहित रहे। उनकी रहस्‍यमयम मृत्‍यु के पश्‍चात उनके घर से एक प्रेम-पत्र प्राप्‍त हुआ। यह पत्र एक काल्‍पनिक स्‍त्री के नाम था, जो सिर्फ बीथोवन के ख्‍यालों में थी।

6 जुलाई, 1806

SubratoND
मेरे प्‍यारे फरिश्‍ते, मेरा सबकुछ, मेरे सबसे अंतरंग- आज केवल कुछ ही शब्‍द और वह भी तुम्‍हारी कलम से।कल तक भी मेरा ठहरना उस पर निर्भर नहीं करता। समय की यह फिजूल बर्बादी क्‍यों। जरूरत खुद बोलती है, फिर दुख की यह गहन अनुभूति क्‍यों। क्‍या इन बलिदानों के बीच भी हमारा प्‍यार जिंदा रह सकेगा। क्‍या यह यथार्थ बदल नहीं सकता कि तुम पूरी तरह मेरी नहीं हो, कि मैं पूरी तरह तुम्‍हारा नहीं।

हे भगवान ! प्रकृति के उस सौंदर्य और सुविधाओं को आकर देख सकते हो, जो इतने जरूरी थे। प्‍यार सबकुछ माँगता है, जो कि न्‍यायपूर्ण भी है। जहाँ तक तुम्‍हें मेरी परवाह है, मैं तुम्‍हारे साथ हूँ और तुम मेरे साथ हो। जब हम पूरी तरह साथ थे तो उस दर्द का छोटा-सा हिस्‍सा तुमने महसूस किया, जो मैं महसूस करता था।

बाहरी संसार बहुत तेजी के साथ भीतरी दुनिया को भी बदल रहा है। हम जरूर एक-दूसरे को देख सकेंगे। पिछले कुछ दिनों में मैंने जीवन को जिस तरह छूकर देखा और महसूस किया है, वह मैं तुम्‍हें नहीं बता सकता। अगर हमारे हृदय एक होते तो इसकी जरूरत ही नहीं थी। लेकिन मेरा हृदय जाने कितनी चीजों से भरा हुआ है। बहुत से ऐसे क्षण आते हैं, जब मैं यह महसूस करता हूँ कि भाषा दरअसल कुछ भी नहीं है। तुम खुश रहो। सबसे परे सत्‍य सिर्फ एक ही‍ है कि मैं तुम्‍हारा हूँ, पूरी तरह से। ईश्‍वर जरूर हमें वह सब देगा, जो हमारे जीवन को और सुखी बना सके।

तुम्‍हारा विश्‍वसनीय,
लुडविग वैन बीथोवन।

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