दिग्विजय सिंह का क्या कांग्रेस से हो रहा मोहभंग, मध्यप्रदेश में दोहराई जाएगी 2020 की सियासी कहानी?
दिग्विजय सिंह के RSS और भाजपा के संगठन की तारीफ पर गर्माई सियासत
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का क्या कांग्रेस से मोहभंग हो रहा है? क्या दिग्विजय सिंह की RSS और भाजपा संगठन की तारीफ करना कांग्रेस आलाकमान पर एक प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है? क्या 2026 के राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में दोहराया जाएगी 2020 का सियासी ड्रामा?
यह 3 ऐसे बड़े सवाल है जो इन दिनों मध्यप्रदेश की सियासी गलियाओं में खूब चर्चा के केंद्र में है। अपने बयानों के जरिए लगातार RSS और भाजपा पर हमला बोलने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के अचानक RSS और भाजपा के संगठन के साथ पीएम मोदी की तारीफ करना सियासी पंडितों को भी चौंका गई है। राजनीति के महिर खिलाड़ी दिग्विजय सिंह का हर बयान और सोशल मीडिया पर हर पोस्ट के पीछे सोची समझी सियासी बिसात होती है।
दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वह नेता है जिन्होने सबसे अधिक आरएसएस के खिलाफ बयानबाजी करते हुए हुए कई बार RSS पर नफरत, फेक न्यूज और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा फैलाने का आरोप लगा चुके है। इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह आरोप लगाते है कि RSS की विचारधारा हिंदुत्व है, जो सनातन धर्म से अलग है और वह सांप्रदायिक तनाव पैदा करती है। ऐसे में दिग्जिय सिंह की तारीफ के कई मयाने निकाले जा रहे है।
दिग्विजय सिंह का क्या कांग्रेस से हो रहा मोहभंग?- RSS और भाजपा को जमकर कठघरे में खड़ा करने वाले दिग्विजय सिंह का अचानक से तारीफ के पुल बांधना क्या इस बात का इशारा है कि दिग्विजय सिंह का भी क्य कांग्रेस से मोहभंग हो रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जब से जीतू पटवारी को मध्यप्रदेश की कमान सौंपी गई है तब से दिग्विजय सिंह कई बार इशारों ही इशारों में उनके नेतृत्व पर सवाल उठा चुके है। वहीं पिछले दिनों दिग्विजय सिंह के विधानयक बेटे और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह को गुना का जिला अध्यक्ष बनाया तो दिग्विजय सिंह के गढ़ राघौगढ़ में जीतू पटवारी के पुतले फूंके गए।
वहीं दिग्विजय सिंह के भाजपा और आरएसस की तारीफ के बाद उनको को भाजपा नेताओं की ओर से लगातार ऑफर मिल रहे है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिग्विजय सिंह को भाजपा में आने का ऑफर देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह जी को भी बधाई. आइए, भाजपा में आपका स्वागत है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि भाजपा है ही इस लायक कि उसकी तारीफ की जाए।
वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो दिग्विजय सिंह की तुलना सरदार पटेल से कर दी। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सच कहने का साहस भी होना चाहिए जो हर किसी में नहीं होता। दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की तारीफ करके अपने साहसी होने का परिचय दिया है। हालांकि इससे दिल्ली दरबार में उनके नंबर अवश्य कम हुए होंगे, पर दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस के अंदर 50 के दशक के नेता सरदार पटेल और अन्य नेताओं की उस परम्परा पर चलने का काम किया है जो सच कहने की हिम्मत रखते थे।
RSS-BJP की तारीफ प्रेशर पॉलिटिक्स? - RSS और भाजपा संगठन की तारीफ करना क्या दिग्विजय सिंह की एक सोची समझी रणनीति है, यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि क्योकि दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 2026 में पूरा हो रहा है। ऐसे में दिग्विजय सिंह ने क्या एक बार फिर राज्यसभा जाने के लिए कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना दिया है जैसा उन्होंने 2020 के राज्यसभा चुनाव के समय किया था। 2020 के राज्यसभा चुनाव के समय राज्यसभा टिकट पर दिग्विजय सिंह से टकराव को लेकर ज्योतिरादित्य सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कर दिया था।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस संगठन को खड़ा करने के लिए राहुल गांधी लगातार युवा चेहरों को आगे करने की रणनीति पर काम कर रहे है। ऐसे में इस बात की संभावना है कम है कि दिग्विजय को एक बार और राज्यसभा जाने का मौका मिले। भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि कहीं ये 2020 राज्यसभा चुनाव की प्रेशर टेक्टिस तो नहीं है जब आपने राज्यसभा में जाने के लिए सरकार को हिला दिया था।
इसके साथ ही नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि “आज ओसामा बिन लादेन की आत्मा दोजख में जार-जार रो रही होगी,और जाकिर नाइक तो अपने आप को अनाथ सा महसूस कर रहा होगा। आप और संघ की तारीफ तौबा रे तौबा,आप ही तो थे जो भगवा आतंकवाद के जनक थे, दिग्विजय सिंह जी आप के मुंह से राम-राम। कहीं ये 2020 राज्यसभा चुनाव की प्रेशर टेक्टिस तो नहीं है जब आपने राज्यसभा में जाने के लिए सरकार को हिला दिया था। मुझे तो यही लगता है, दो महीने बाद राज्यसभा के फिर चुनाव हैं तो आप कांग्रेस के हाई कमान पर दबाव बनाने लिए ये सब कर रहे हैं”।