Publish Date: Sun, 05 Sep 2021 (14:13 IST)
Updated Date: Sun, 05 Sep 2021 (14:22 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने तय किया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को 'फाउंडेशन कोर्स' में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार और जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार भी पढ़ाए जाएंगे।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार मेडिकल स्नातक के प्रथम वर्ष के फाउंडेशन कोर्स में प्रसिद्ध विचारकों के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और ये इसी सत्र से पढ़ना होगा। इसमें हेडगेवार और उपाध्याय के विचार भी समाहित किए गए हैं। इसके अलावा डॉ भीमराव अंबेडकर, महर्षि चरक और आचार्य सुश्रुत के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। ये पाठ्यक्रम में 'मेडिकल इथिक्स' के रूप में पढ़ाए जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस मामले में ट्वीट के जरिए भाजपा सरकार को निशाने पर लिया है। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा शुरू से ही अपनी विचारधारा और अपने खास एजेंडे को लोगों पर थोपने का काम करती रहती है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र। अब मध्यप्रदेश में एमबीबीएस के विद्यार्थियों को जनसंघ व आरएसएस के संस्थापकों के विचार पढ़ाए जाएंगे।
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर अपनी विचारधारा को थोपने का प्रयास वर्षों से कर रही है। और यह भी इसी का एजेंडा है। देश में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनका आजादी की लड़ाई से लेकर देश के विकास और देशहित में महत्वपूर्ण योगदान है। बेहतर तो यह है कि भाजपा सरकार निष्पक्ष भावना से उनके विचारों से छात्रों को अवगत कराने का काम करे, ना कि अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति व खास विचारधारा के एजेंडों को थोपने का कार्य करे।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने ट्वीट के जरिए लिखा है 'अकेले हेडगेवार, दीनदयाल ही क्यों। मैं तो भाजपा सरकार से बोलता हूं कि सावरकर और गोडसे के बारे में भी बच्चों को पढ़ाएं, जिससे पता चले कि सावरकर ने कितनी बार अंग्रेजों को माफीनामे लिखे और गोडसे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की हत्या की।'
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने एक बयान में कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य में नेताओं की जीवनी पढ़ाकर डॉक्टर बनाने का अभिनव प्रयोग हो रहा है। एमबीबीएस पाठ्यक्रम में संघ के नेताओं की जीवनी पढ़ाने से चिकित्सा शिक्षा की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।
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Publish Date: Sun, 05 Sep 2021 (14:13 IST)
Updated Date: Sun, 05 Sep 2021 (14:22 IST)