Hanuman Chalisa

RTI से खुलासा, 5 साल में 3,427 बैंक शाखाओं के वजूद पर असर

भाषा
मंगलवार, 5 नवंबर 2019 (10:03 IST)
इंदौर (मध्यप्रदेश)। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि बीते 5 वित्तीय वर्षों के दौरान विलय या शाखाबंदी की प्रक्रिया से सार्वजनिक क्षेत्र के 26 सरकारी बैंकों की कुल 3,427 बैंक शाखाओं का मूल अस्तित्व प्रभावित हुआ है।
 
खास बात यह है कि इनमें से 75 प्रतिशत शाखाएं देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की प्रभावित हुई हैं। आलोच्य अवधि के दौरान एसबीआई में इसके 5 सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय हुआ है।
ALSO READ: क्या आपका पैसा बैंकों में वाकई सुरक्षित है?
यह जानकारी आरटीआई के जरिए ऐसे वक्त सामने आई है, जब देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर इन्हें 4 बड़े बैंकों में तब्दील करने की सरकार की नई योजना पर काम शुरू हो चुका है। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी रविवार को साझा की।
 
इसके मुताबिक देश के 26 सरकारी बैंकों की वित्तीय वर्ष 2014-15 में 90 शाखाएं, 2015-16 में 126 शाखाएं, 2016-17 में 253 शाखाएं, 2017-18 में 2,083 बैंक शाखाएं और 2018-19 में 875 शाखाएं या तो बंद कर दी गईं या इन्हें दूसरी बैंक शाखाओं में विलीय कर दिया गया।
 
आरटीआई अर्जी पर मिले जवाब के अनुसार बीते 5 वित्तीय वर्षों में विलय या बंद होने से एसबीआई की सर्वाधिक 2,568 बैंक शाखाएं प्रभावित हुईं। आरटीआई कार्यकर्ता ने आरबीआई से सरकारी बैंकों की शाखाओं को बंद किए जाने का सबब भी जानना चाहा था। लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला। इस प्रश्न पर केंद्रीय बैंक ने आरटीआई कानून के संबद्ध प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी एक सूचना नहीं, बल्कि एक राय है।
 
आरबीआई ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का विलय 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ था। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय 1 अप्रैल 2019 से अमल में आया था।
 
इस बीच सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारी संगठनों ने इनके विलय को लेकर सरकार की नई योजना का विरोध तेज कर दिया है। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि अगर सरकार देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाती है, तो इन बैंकों की कम से कम 7,000 शाखाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें से अधिकांश शाखाएं महानगरों और शहरों की होंगी।
 
वेंकटचलम ने आशंका जताई कि प्रस्तावित विलय के बाद संबंधित सरकारी बैंकों का कारोबार घटेगा, क्योंकि आमतौर पर देखा गया है कि किसी बैंक शाखा के बंद होने या इसके किसी अन्य शाखा में विलीन होने के बाद ग्राहकों का उससे आत्मीय जुड़ाव समाप्त हो जाता है।
 
बहरहाल, अर्थशास्त्री जयंतीलाल भंडारी की राय है कि सार्वजनिक बैंकों का विलय समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाने से सरकारी खजाने को फायदा होगा। इसके अलावा बड़े सरकारी बैंक अपनी सुदृढ़ वित्तीय स्थिति के कारण आम लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा कर्ज बांट सकेंगे जिससे देश में आर्थिक गतिवधियां होंगी।
Show comments

जरूर पढ़ें

चांदी को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, आयात के नियम किए सख्‍त, जानिए क्यों उठाया यह कदम?

ट्रंप का जिनपिंग से बदला या अतिरिक्त सावधानी? एयरपोर्ट पर ही फेंक दिए चीनी उपहार

नीदरलैंड ने भारत को दिया खास तोहफा, PM मोदी को लौटाई ये बेशकीमती चीज, चोल राजवंश से है कनेक्‍शन

भारत में जब्त हुई 182 करोड़ की कैप्टागन, इसे क्यों कहा जाता है जिहादी ड्रग, क्या हैं इसके साइड इफेक्ट

एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: एयर फोर्स वन पर चढ़ने से पहले अमेरिकी स्टाफ ने चीनी गिफ्ट्स को डस्टबिन में क्यों फेंका?

सभी देखें

नवीनतम

CM धामी की चम्पावत को बड़ी सौगात, 25 नए हैंडपंपों के लिए 89 लाख रुपये मंजूर

कोरोना महामारी आई, फिर युद्ध शुरू हुए और अब ऊर्जा संकट, PM मोदी ने दुनिया को किस बात को लेकर दी चेतावनी

Pakistan में पेट्रोल-डीजल हुआ सस्ता, भारत में बढ़े दाम, जानिए दोनों देशों में कितना फर्क

भारत पर मंडरा रहा El Nino 2026 का खतरा, IMD ने कमजोर मानसून और सूखे की दी चेतावनी

रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग, रेल मार्ग हुआ बंद

अगला लेख