चुनावी कैंपेन में भाजपा आगे, कांग्रेस दफ्तर में इतना सन्नाटा क्यों है भाई...

भोपाल। दोपहर 12 बजे का वक्त, मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर का नजारा, अंदर पार्टी के बड़े नेता टिकट के दावेदारों पर मंथन कर रहे हैं, तो पार्टी दफ्तर के बाहर टिकट की चाहत में नेताओं और कार्यकर्ताओं की इतनी भीड़ है कि सुरक्षा के लिए पुलिसबल को बढ़ाना पड़ा। वहीं दूसरी ओर ठीक इसी समय कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय के बाहर अजीब सा सन्नाटा है।


कांग्रेस दफ्तर के बाहर इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे हैं। पार्टी दफ्तर में भी कोई बड़ा नेता नहीं है, हर ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। पूछने पर पता चलता है कि कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता दिल्ली में हैं और टिकट तय कर रहे हैं। इसके बाद मन में फिर वही सवाल कि क्या मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर टिकट के फेर में फंस गई है। अब जब प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए एक महीने से कम समय बचा है, तब कांग्रेस के दिग्गज नेता चुनावी मैदान से दूर दिल्ली में टिकट फाइनल करने के चक्कर में उलझ गए हैं। टिकट को लेकर पहले ही कांग्रेस का सिर फुटौव्वल सबके समाने आ चुका है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने टिकट के लिए गाइडलाइन तय करते हुए सर्वे पर टिकट बांटने का फार्मूला दिया है, लेकिन अब पार्टी में जिस तरह दिल्ली में पिछले बीस दिनों से टिकटों को लेकर माथापच्ची हो रही है, उससे तो यही लगता है कि टिकट को लेकर पार्टी के दिग्गज नेताओं में एक राय नहीं बन रही है। सूत्र बताते हैं कि इस बार भी कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता अपने-अपने पसंदीदा नेताओं को टिकट दिलाने की जुगाड़ में हैं। वहीं टिकट को लेकर पार्टी के बड़े नेताओं में एक राय भी नहीं बन रही है।

दिल्ली में लगातार होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के बाद तो यही लग रहा है कि कांग्रेस में टिकट को लेकर सब सही नहीं चल रहा है। बताया जा रहा है कि टिकट को लेकर सूबे के दो सबसे बड़े नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में भी एक राय नहीं बन रही है। पार्टी में टिकट को लेकर सबसे ज्यादा विवाद मालवा और निमाड़ में टिकट बंटवारे को लेकर है। जहां पार्टी का हर दिग्गज अपने-अपने पसंदीदा को टिकट दिलाना चाहता है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से कांग्रेस के सूबे के दिग्गज नेता चुनावी मैदान में सिर्फ़ राहुल गांधी की रैलियों में ही दिखाई दिए हैं, राहुल की रैली के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की एक भी चुनावी रैली सूबे में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद नहीं हुई है।

ऐसा ही कुछ हाल पार्टी के दूसरे दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी है। सिंधिया ने अपने गढ़ में राहुल की रैली और रोड शो कराकर अपनी सियासी ताकत तो दिखा दी, लेकिन जो सिंधिया सूबे में पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक हैं, वे सूबे में वैसे सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे हैं। जैसी जिम्मेदारी पार्टी ने उनको चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाकर सौंपी है। दूसरी तरफ चौथी बार सत्ता में वापसी करने को आतुर दिखाई दे रही भाजपा की ओर से खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सूबे के हर संभाग में रैली कर राहुल गांधी को निशाने पर ले ले रहे हैं। वहीं पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी जनआशीर्वाद यात्रा के जरिए पूरे प्रदेश को नाप रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज एक ओर जहां भाजपा के गढ़ मालवा में रोड शो और सभा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के गढ़ ग्वालियर चंबल में सेंध लगाने के लिए बुधवार को ग्वालियर में बड़ा रोड शो और सभा की, भाजपा के अन्य सभी बड़े नेता चुनावी मैदान में सक्रिय नजर आ रहे हैं। लोगों तक पहुंचने के लिए पार्टी ने समृद्ध मध्यप्रदेश कैंपेन लांच कर कांग्रेस से बढ़त ले ली है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि कांग्रेस क्या 2013 विधानसभा चुनाव की गलतियों को फिर मध्यप्रदेश में दोहरा रही है। जब पार्टी के सभी बड़े नेता अंत तक टिकट के चक्कर में दिल्ली में फंसे थे और भाजपा ने बाजी मारते हुए जीत हासिल कर ली थी।

कुछ ऐसा ही इस बार के चुनाव में भी हो रहा है। ठीक चुनाव से पहले दिग्गजों के चुनावी मैदान से दूर रहने से और टिकट को लेकर नेताओं में आ रही दूरियों की खबरों से कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता भी अब निराश हो रहा है। भोपाल में चुनाव के समय प्रदेश के दूरदराज इलाके से पार्टी के दफ्तर पहुंचने वाला कांग्रेस का कार्यकर्ता यही पूछ रहा है कि इतना सन्नाटा क्यों है भाई...

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