बुंदेलखंड से राहुल गांधी और कांग्रेस का खास रिश्ता, जानिए क्या है इसमें खास...

भोपाल। शुक्रवार को मध्यप्रदेश के दौरे पर आ रहे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बुंदेलखंड में चुनावी प्रचार शंखनाद करेंगे। राहुल का बुंदेलखंड दौरा काफी अहम माना जा रहा है। राहुल गांधी का बुंदेलखंड से एक खास रिश्ता रहा है। दस साल पहले 2008 में राहुल जब पहली बार बुंदेलखंड के दौरे पर आए थे तो उनका ये दौरा मीडिया की सुर्खियों में रहा था। राहुल ने अपने दौरे के दौरान बुंदेलखंड की गरीबी और उसकी उपेक्षा को बहुत करीब से देखा था।


राहुल इस दौरान कई ऐसे लोगों से मिले जिनके घरों में खाने का सामान नहीं था। बुंदेलखंड के इस पहले दौरे के दौरान राहुल ने गरीबी को समझने के लिए टीकमगढ़ के टपरीया गांव में एक दलित के घर रात बिताई थी और खाना भी खाया था। इस दौरे के दौरान राहुल गांधी ने लोगों से वादा किया था कि सरकार उनके जीवन को बदलने की हरसंभव कोशिश करेगी, बुंदेलखंड में विकास की गंगा बहाई जाएगी और रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। राहुल के इस दौरे के बाद मनमोहन सरकार ने बुंदेलखंड के अब तक के सबसे बड़े पैकेज साढ़े सात हजार करोड़ के रिलीफ फंड का ऐलान किया था लेकिन ये पैकेज भी बुंदेलखंड की दशा और दिशा नहीं बदल सका। भाजपा ने यूपीए सरकार के इस पैकेज को लेकर कांग्रेस पर कई बार सवाल भी उठाए।

बुंदेलखंड का चुनावी गणित : राहुल गांधी के बुंदेलखंड दौरे का सियासी गणित समझने के लिए बुंदेलखंड के सियासी समीकरण को समझना पड़ेगा। बुंदेलखंड की 29 विधानसभा सीटों में से 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 23 सीटों पर जीत हासिल की थी वहीं कांग्रेस को महज 6 सीट हाथ लगी थी। यूपीए सरकार का बुंदेलखंड का भारी-भरकम पैकेज भी कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम नहीं कर सका। ऐसे में इस बार सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी कांग्रेस को बुंदेलखंड से काफी उम्मीद है।

कांग्रेस की इस उम्मीद को और मजबूत करने के लिए राहुल गांधी बुंदेलखंड के केंद्र सागर के देवरी में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि राहुल गांधी देवरी से पूरे बुंदेलखंड को साधेंगे और वहां की स्थानीय समस्याओं की बात करेंगे। इसके साथ ही राहुल गांधी कांग्रेस के बुंदेलखंड में विकास के रोड मैप को भी लोगों के सामने रख सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी बेरोजगारी की मार झेल रहे बुंदेलखंड में रोजगार के अवसर पैदा करने कि बात करेंगे। हालांकि बीजेपी के इस गढ़ में राहुल गांधी कितना कारगर होंगे इसका जवाब किसी भी कांग्रेस नेता के पास नहीं है, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता 29 सीट में से 15 पर जीत का दावा भी कर रहे हैं।

बीजेपी का बुंदेलखंड में प्रभाव : भाजपा का बुंदेलखंड में काफी प्रभाव माना जाता है। बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कैबिनेट मिनिस्टर उमा भारती के साथ ही शिवराज कैबिनेट में मंत्री भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, जयंत मलैया, ललिता यादव सहित कई नेता बुंदेलखंड से आते हैं, दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान की छवि बुंदेलखंड में काफी अच्छी होना भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होता है।

बुंदेलखंड का जातीय समीकरण : बुंदेलखंड के जातीय समीकरण में कांग्रेस भाजपा पर हावी होती दिख रही है। कांग्रेस ने इस बार चुनाव में लोधी, ब्राह्मण, जैन, यादव और राजपूत बाहुल्य वाली सीट पर इसी जाति के लोगों को महत्व दिया गया है। उदाहरण के तौर पर वर्तमान वित्तमंत्री जयंत मलैया के सामने कांग्रेस ने दमोह से युवा चेहरे राहुल लोधी को चुनावी मैदान में उतारा है। राजनीति के जानकारों के अनुसार इस बार जातीय समीकरण के हिसाब से कांग्रेस ने टिकट वितरण किया है जिसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा।

बुंदेलखंड में बीजेपी में बड़ी बगावत : बुंदेलखंड में भाजपा को इस बार बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के बुंदेलखंड से दो बड़े नेता रामकृष्ण कुसमारिया और कुसुम मेहदले पार्टी से नाराज चल रहे हैं। कुसमारिया दमोह और पथरिया से चुनावी मैदान में हैं जिसके कारण कांग्रेस को फायदा हो सकता है।

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