Hanuman Chalisa

वैचारिक संघर्ष नहीं, केरल में है लाल आतंक

लोकेन्द्र सिंह
सोमवार, 14 अगस्त 2017 (21:00 IST)
केरल पूरी तरह से कम्युनिस्ट विचारधारा के 'प्रैक्टिकल' की प्रयोगशाला बन गया है। केरल में जिस तरह से वैचारिक असहमतियों को खत्म किया जा रहा है, वह एक तरह से कम्युनिस्ट विचार के असल व्यवहार का प्रदर्शन है। केरल में जबसे कम्युनिस्ट सत्ता में आए हैं, तब से कानून का राज अनुपस्थिति दिखाई दे रहा है। जिस तरह चिह्नित करके राष्ट्रीय विचार के साथ जुड़े लोगों की हत्याएं की जा रही हैं, उसे देखकर यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि केरल में जंगलराज आ गया है। 
 
लाल आतंक अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। 'ईश्वर का घर' किसी बूचड़खाने में तब्दील होता जा रहा है। 29 जुलाई को एक बार फिर गुंडों की भीड़ ने घेरकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता राजेश की हत्या कर दी। हिंसक भीड़ ने पहले 34 वर्षीय राजेश की हॉकी स्टिक से क्रूरता पिटाई की और फिर उनका हाथ काट दिया। राजेश तकरीबन 20 मिनट तक सड़क पर तड़पते रहे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया किंतु उनका जीवन नहीं बचाया जा सका। राजेश के शरीर पर 83 घाव बताते हैं कि कितनी नृशंषता से उनकी हत्या की गई। 
 
हमारे देश के राष्ट्रीय मीडिया और 'अवॉर्ड वापसी गैंग' को यह हिंसा दिखाई नहीं देती है। अपने आपको संवेदनशील और मानवतावादी कहने वाले लोग इस समय देश में 'मॉब लिंचिंग' के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। राजेश की हत्या भी एक भीड़ ने की है, लेकिन यह तय मानिए कि इस 'मॉब लिंचिंग' को लेकर कोरा हल्ला मचा रहे लोग राजेश की हत्या के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलेंगे। विरोध प्रदर्शन का यह चयनित और बनावटी दृष्टिकोण ही उनकी प्रत्येक मुहिम को खोखला सिद्ध कर देता है। 
 
धूर्तता की हद तब पार हो जाती है, जब इस हिंसा को 'राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष' का नाम देकर पल्ला झाड़ा जाता है। इसका मतलब क्या हुआ? क्या सभ्य समाज में राजनीतिक और वैचारिक असहमति के नाम पर होने वाली हत्याएं स्वीकार्य होनी चाहिए? लाल आतंक पर पर्दा डालने के लिए कम्युनिस्ट बुद्धिवादियों ने सुनियोजित ढंग से यह भी स्थापित कर दिया है कि केरल में जो हिंसा है, वह दोनों तरफ से है। यदि हिंसा दोनों तरफ से है, तब एक ही पक्ष की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं? यह कैसे संभव हो सकता है कि एक सामान्य घटना को भी बढ़ा-चढ़ाकर चर्चा में लेकर आने वाला 'झूठों का समूह' केरल में दूसरे पक्ष की हिंसा को उभार नहीं सका है? दरअसल, राजनीतिक हिंसा कम्युनिस्ट विचारधारा का एक अंग है इसलिए कम्युनिस्ट सरकार के संरक्षण में होने वाली राजनीतिक हिंसा पर चर्चा नहीं की जाती है। 
 
एक राज्य में जब गुंडाराज बढ़ जाता है, निर्दोष लोगों की हत्याओं के साथ ही अन्य प्रकार के अपराध बढ़ जाते हैं, तब सामान्य तौर पर माना जाता है कि राज्य सरकार असफल साबित हो रही है। कानून पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहा, किंतु केरल के संदर्भ में यह सामान्य विचार वास्तविकता का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। विरोधी विचारधारा के लोगों की हत्याएं तो किसी भी कम्युनिस्ट सरकार की सफलता का पैमाना है। उसी पैमाने पर खरा उतरने का प्रयास केरल की कम्युनिस्ट सरकार कर रही है। इस बात को समझने के लिए हमें रूस से लेकर चीन की साम्यवादी सरकारों के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हुईं हिंसक कार्रवाइयों को पढ़ना चाहिए। 
 
दुनिया में कम्युनिस्ट सरकार से मतभिन्नता रखने वाले लोगों की बड़े पैमाने पर हत्याएं की गई हैं। जब हम इतिहास की किताब के पन्ने पलटेंगे, तब पाएंगे कि रूस में लेनिन और स्टालिन, रूमानिया में चासेस्क्यू, पोलैंड में जारू जेलोस्की, हंगरी में ग्रांज, पूर्वी जर्मनी में होनेकर, चेकोस्लोवाकिया में ह्मूसांक, बुल्गारिया में जिकोव और चीन में माओ-त्से-तुंग ने किस तरह नरसंहार मचाया। इन अधिनायकों ने सैनिक शक्ति, यातना शिविरों और असंख्य व्यक्तियों को देश निर्वासन करके भारी आतंक का राज स्थापित किया। 
 
मार्क्सवादी रूढ़िवादिता ने कंबोडिया में पोल पॉट ने वहां की संस्कृति के विद्वानों को मौत के घाट उतार दिया। जंगलों और खेतों में उन्हें मार गिराया गया। लेनिन कहता था कि विरोधियों को सरेआम गोली मार देनी चाहिए। कम्युनिस्ट स्वयं मानते हैं कि उनकी विचारधारा में असहमतियों के सुर स्वीकार्य नहीं हैं। अपने से अलग विचार के लिए कोई स्थान नहीं है। यही सब कम्युनिस्टों ने भारत में किया है, जहां-जहां उनकी सरकारें रही हैं।
 
संघ कार्य के बढ़ने से भयभीत हैं कम्युनिस्ट : केरल में लाल आतंक बढ़ने के दो कारण हैं। एक का जिक्र ऊपर आ चुका है कि कम्युनिस्ट विचार भीतर से घोर असहिष्णु और हिंसक हैं। दूसरा कारण है, केरल में राष्ट्रीय विचार का बढ़ता प्रभाव। अपने गढ़ में तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय विचार के प्रभाव से कम्युनिस्ट भयभीत हैं। अपनी बची-खुची जमीन को बचाने के लिए वे पूरी ताकत लगा रहे हैं। 
 
माकपा से जुड़े अराजक तत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों के घरों पर हमला करके उनमें भय पैदा करना चाहते हैं। कम्युनिस्ट गुंडे आरएसएस और भाजपा के कार्यकर्ताओं को घेरकर उनकी हत्या करके शेष समाज को संदेश देना चाहते हैं कि राष्ट्रीय विचार से दूर रहो, वरना मारे जाओगे। 
 
हालांकि, यह हिंसक विचारधारा अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही है, क्योंकि केरल के समाज को इनका राष्ट्र विरोधी व्यवहार समझ आने लगा है। यही कारण है विपरीत परिस्थितियों में भी केरल में संघ कार्य दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2013-14 में केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग 4,000 शाखाएं थीं, जो आज की स्थिति में बढ़कर 5,500 से अधिक हो गई हैं। केरल का युवा बड़ी संख्या में संघ से जुड़ रहा है। अपनी जमीन खिसकने से कम्युनिस्ट डरे हुए हैं।
 
केरल बंद को मिला समाज का समर्थन : तथाकथित सेक्युलरों से उम्मीद नहीं है कि वह राजेश की हत्या के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे इसलिए केरल की भारतीय जनता पार्टी ने 30 जुलाई को लाल आतंक के विरुद्ध राज्यव्यापी हड़ताल की। राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों की हत्याओं के विरुद्ध केरल बंद के आह्वान को समाज ने भरपूर समर्थन दिया। इस दौरान भाजपा के प्रांतीय अध्यक्ष कुमनम राजशेखरन ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे सीपीएम का हाथ है। हालांकि माकपा ने इस आरोप से पल्ला झाड़ लिया है लेकिन हकीकत सबको पता है। केरल की पुलिस ने स्वयं माना है कि राजेश की हत्या करने वाली गैंग में माकपा का कार्यकता शामिल है। 
 
क्या केरल की सरकार इस प्रश्न का जवाब दे सकती है कि माकपा के सत्ता में आने के बाद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले क्यों बढ़ गए और उनकी हत्याएं क्यों की जा रही हैं? मई 2016 से अब तक आरएसएस और भाजपा के लगभग 20 कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। एक-दो हत्याओं को लेकर असहिष्णुता की मुहिम चलाकर पूरे देश को बदनाम करने वाले झूठों के समूह ने इतनी बड़ी संख्या में हुई हत्याओं पर बेशर्मी से चुप्पी ओढ़ रखी है। 
 
2016 से अब तक के बड़े हमले : 
 
सुजीत : 19 फरवरी 2016 को आरएसएस कार्यकर्ता 27 वर्षीय युवक सुजीत की उनके परिवार के सामने ही कथित माकपा कार्यकर्ताओं ने गला काटकर हत्या कर दी।
 
प्रमोद : 19 मई 2016 को थ्रिसूर जिले में भाजपा कार्यकर्ता 33 वर्षीय प्रमोद की माकपा के लोगों ने हत्या कर दी। प्रमोद के सिर पर ईंट से वार किया गया जिसके कारण उनकी मौत हो गई। 
 
रामचंद्रन : 11 जुलाई 2016 को भारतीय मजदूर संघ के सीके रामचंद्रन की उनके घर में उनकी पत्नी के सामने ही कू्ररतापूर्वक हत्या कर दी गई।
बिनेश : 4 सितंबर 2016 को कन्नूर में संघ के कार्यकर्ता बिनेश की हत्या की गई। 
 
रेमिथ : अक्टूबर 2016 में 26 साल के रेमिथ की हत्या कर दी गई। 14 साल पहले उसके पिता को भी मार दिया गया था। ये हत्याएं केरल के मुख्यमंत्री विजयन के गांव पिनाराई गांव में हुईं।
 
राधाकृष्णनन की परिवार सहित हत्या : 28 दिसंबर 2016 की रात कोझीकोड के पलक्कड़ में माकपा गुंडों ने भाजपा नेता चादयांकलायिल राधाकृष्णन के घर पर पेट्रोल बम से उस वक्त हमला किया, जब उनका समूचा परिवार गहरी नींद में था। सोते हुए लोगों को आग के हवाले करके बदमाश भाग गए। इस हमले में भाजपा की मंडल कार्यकारिणी के सदस्य 44 वर्षीय चादयांकलायिल राधाकृष्णन, उनके भाई कन्नन और भाभी विमला की मौत हो गई। राधाकृष्णनन ने उसी दिन दम तोड़ दिया था। जबकि आग से बुरी तरह झुलसे कन्नन और उनकी पत्नी विमला की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन का चुनाव क्षेत्र है।
 
संतोष : 18 जनवरी 2017 को कन्नूर में भाजपा के कार्यकर्ता मुल्लाप्रम एजुथान संतोष की हत्या की गई। संतोष की हत्या माकपा के गुंडों ने उस वक्त कर दी, जब वह रात में अपने घर में अकेले थे।
 
बीजू : 12 मई 2017 को बाइक से जा रहे आरएसएस कार्यकर्ता एवी बीजू को कार से टक्कर मारकर सड़क पर गिराया और बाद में तलवार से हमला कर हत्या कर दी।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत

World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

अगला लेख