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ओम पुरी भारतीय सिनेमा के एक मंझे हुए कलाकार थे

ब्रह्मानंद राजपूत
* ओम पुरी की प्रथम पुण्यतिथि 6 जनवरी 2018 पर विशेष
 
महान कलाकार ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 में हरियाणा के अम्बाला शहर में  एक पंजाबी परिवार में हुआ। ओम पुरी के पिता भारतीय सेना में थे। अमरीश पुरी और  मदन पुरी उनके चचेरे भाई थे।
 
ओम पुरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की। ओम  पुरी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया,  इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से भी पढ़ाई की।  एनएसडी में नसीरुद्दीन शाह उनके सहपाठी थे। 1976 में ओम पुरी ने पुणे फिल्म संस्थान  से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की  शिक्षा दी। ओम पुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप 'मजमा' की स्थापना की।
 
ओम पुरी का विवाह 1991 में अभिनेता अन्नू कपूर की बहन सीमा कपूर से हुआ था,  लेकिन कुछ समय बाद आपसी तालमेल न होने के कारण दोनों में तलाक हो गया। अन्नू  कपूर की दूसरी शादी 1993 में पत्रकार नंदिता पुरी से हुई जिनसे उनका एक पुत्र ईशान भी  है। नंदिता ने ओम पुरी पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था, इसके बाद 2013 में दोनों  अलग हुए।
 
ओम पुरी ने अपने फिल्म करियर की शुरुआत 1972 में मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल'  से की। लेकिन भारतीय सिनेमा में उनकी अलग पहचान 1980 में आई पहलान निहलानी  की 'आक्रोश' से बनी। ओम पुरी ने अमरीश पुरी, स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह और शबाना  आजमी के साथ मिलकर कई यादगार फिल्में दीं जिनमें ओम पुरी का अभिनय दमदार था।
 
ओम पुरी एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने एक साधारण-सा चेहरा होने के बावजूद अपने  अभिनय से फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई और कई सफलतम फिल्में दीं।  'आक्रोश' में शानदार अभिनय के लिए ओम पुरी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर  अवॉर्ड मिला।
 
इसके बाद उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में शानदार अभिनय किया और अपने अभिनय के बल  पर फिल्म जगत में शोहरत भी प्राप्त की। ओम पुरी ने अपने फिल्मी जीवन में हर तरीके  की भूमिकाएं निभाईं। ओम पुरी ने सकारात्मक भूमिकाओं के साथ-साथ नकारात्मक और  हास्य भूमिकाएं भी एक मंझे हुए कलाकार के रूप में कीं। ओम पुरी हमेशा से अपने गंभीर  अभिनय के लिए जाने जाते थे।
 
ओम पुरी को 2 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। ओम पुरी को 1981 में  पहली बार आरोहण फिल्म में शानदार अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और दूसरी  बार 1983 में 'अर्द्धसत्य' फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय  पुरस्कार मिला। इसके साथ ही ओम पुरी को 1990 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक  सम्मान पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।
 
ओम पुरी ने हिन्दी फिल्मों के साथ-साथ हॉलीवुड फिल्मों में भी अभिनय किया है जिनमें  प्रमुख रूप से 'ईस्ट इज ईस्ट' और 'सिटी ऑफ जॉय' हैं। ओम पुरी अपनी शानदार आवाज  से हर भूमिका में जान डाल देते थे। ओम पुरी की आवाज और डायलॉग डिलीवरी हमेशा से  बेहतरीन रही। ओम पुरी ने अभिनय के साथ-साथ कई अन्य फिल्मों में अपनी आवाज भी  दी। ओम पुरी ने अपने जीवन में धारावाहिक 'भारत एक खोज', 'कक्काजी कहिन', 'सी  हॉक्स', 'अंतराल', 'मि. योगी', 'तमस' और 'यात्रा', 'आहट', 'सावधान इंडिया' में भी काम  किया।
 
ओम पुरी ने अपने जीवन में अनेक हिन्दी फिल्मों सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम  किया। ओम पुरी ने कई अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया। ब्रिटिश फिल्म इंडस्ट्री में सेवा  देने के लिए 2004 में ओम पुरी को 'ऑनरेरी ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश  एम्पायर' का अवॉर्ड दिया गया। 2014 में ओम पुरी ने कॉमेडी-ड्रामा 'हंड्रेड फुट जर्नी' में  हेलेन मिरेन के साथ काम किया।
 
ओम पुरी का अपने जीवन में विवादों से भी गहरा नाता रहा। एक टीवी बहस में ओम पुरी  ने सरहद पर भारतीय जवानों के मारे जाने पर कहा था, 'उन्हें आर्मी में भर्ती होने के लिए  किसने कहा था? उन्हें किसने कहा था कि हथियार उठाओ?' इस बयान के बाद ओम पुरी  के खिलाफ केस दर्ज किया गया। बाद में इस मामले में उन्होंने माफी मांगते हुए कहा था,  'मैंने जो कहा उसके लिए मैं काफी शर्मिंदा हूं। मैं इसके लिए सजा का भागीदार हूं। मुझे  माफ नहीं किया जाना चाहिए। मैं उड़ी हमले में मारे गए भारतीय सैनिकों के परिवारों से  माफी मांगता हूं।'
 
इसके बाद जिंदादिल ओम पुरी पश्चाताप के लिए शहीद बीएसएफ जवान नितिन यादव के  घर इटावा गए और ओम पुरी ने शहीद जवान की फोटो पर फूल चढ़ाए। उन्होंने शहीद  नितिन यादव के पिता को गले से लगा लिया। ओम पुरी के आंसू हैं कि थमने का नाम ही  नहीं ले रहे थे।
 
इस मौके पर ओम पुरी ने अपनी गलती मानते हुए सबके सामने कहा कि 'मैंने बहस के  दौरान जो शहीद का अपमान किया था, वो मेरी गलती थी। उस दिन से मेरा दिल विचलित  था। अगर किसी और देश में होता तो हाथ और सिर कटवा दिया गया होता।' ओम पुरी ने  अपने जीवन में अनेक गलतियां कीं और उनको सुधारा भी। दुनिया में कुछ ही लोगों में  अपनी गलती स्वीकार करने की हिम्मत होती है, उनमें से ओम पुरी भी एक थे।
 
'नरसिम्हा, आक्रोश, माचिस, आरोहण, अर्द्धसत्य, घायल, मालामाल वीकली, रंग दे बसंती,  खूबसूरत, चुप-चुप के' जैसी सैकड़ों फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से हर तरीके की  भूमिकाओं से पहचान बनाने वाले ओम पुरी की आज 6 जनवरी 2018 को प्रथम पुण्यतिथि  है।
 
ओम पुरी का जिंदादिल अभिनय भारत के प्रत्येक नागरिक के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा।

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