Dharma Sangrah

भाईजान का 'बजरंगी' होना...

राजेश ज्वेल
आमिर खान का यह कहना 100 फीसदी सही है कि सलमान खान की जितनी तगड़ी फैन फॉलोविंग है उनकी उतनी नहीं है। उन्हें अपनी फिल्म को कामयाब बनाने के लिए अभिनय से लेकर कहानी, निर्देशन, संवाद यानि हर क्षेत्र में कड़ी मेहनत करना पड़ती है, तब जाकर टिकट खिड़की पर फिल्म सफल होती है। 
इसके विपरीत सलमान खान की फिल्में सिर्फ उनके घनघोर प्रशंसकों की बदौलत यूं ही सफल हो जाती है वरना 'बॉडीगार्ड' जैसी फिल्म किसी अन्य कलाकार की होती तो टिकट खिड़की पर पानी भी नहीं मांगती, लेकिन सलमान के कारण ये फिल्म भी सुपरहिट हो गई। 'दबंग' मार्का टाइप सलमान खान की फिल्मों ने प्रशंसकों का जो उन्माद बढ़ाया वह 'बजरंगी भाईजान' तक अपने चरम पर है। हालांकि 'बजरंगी भाईजान' सलमान खान की दबंग मार्का फिल्मों से पूरी तरह अलहदा है और इसमें एक्शन की बजाय इमोशन का तगड़ा डोज दिया गया है। फिल्म के प्रदर्शन से पहले ही धर्म-कर्म के ठेकेदारों के पेट में मरोड़े उठने लगे थे और कई दृश्यों के साथ फिल्म के टाइटल यानि शीर्षक पर भी आपत्ति ली मगर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। 
 
वैसे भी मुंबइया फिल्म इंडस्ट्री हिन्दू-मुस्लिम और अन्य समाजों की एकजुटता का सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जहां पर जात-पात जैसी बीमारी है ही नहीं। सलमान खान का परिवार तो वैसे भी आधा हिन्दू और आधा मुस्लिम है ही और ईद के साथ-साथ गणेश पूजन से लेकर अन्य हिन्दू त्यौहारों को भी खान परिवार जोरशोर से मनाता आया है। सलमान भाईजान का बजरंगी होना भी हो सकता है फिरकापरस्तों और कठमुल्लों की जमात को नागवार गुजरे मगर दर्शकों ने भाईजान के बजरंगी होने पर मुहर लगा दी। 
 
फिल्म में सलमान बजरंग बली के जबरदस्त भक्त बताए गए हैं, जो कहीं पर भी बंदर को देखते ही जय बजरंग बली कहकर हाथ जोडऩा नहीं भूलते। भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि को लेकर वैसे तो कई फिल्म बन चुकी हैं, लेकिन यह बात अलग है कि दोनों ही मुल्कों के सियासतदार समस्याओं को सुलझाने की बजाय लटकाने में ही अधिक हित देखते आए हैं। भारत ने तो खैर उदारवादी रवैया अपनाया मगर पाकिस्तान में लोकतंत्र की बजाय अभी भी सेनावाद चलता है और दिखावे के लिए ही चुनाव होते हैं। पाकिस्तान की सत्ता पर सेना हमेशा से ही हावी रही है और तालिबानी सोच के चलते ही भारत-पाकिस्तान और उससे जुड़ा कश्मीर का मुद्दा विवादित रहा है। 
 
बजरंगी भाईजान में कश्मीर के इस हिस्से में ही शूटिंग की गई है और फिल्म की कहानी भी उसी की पृष्ठभूमि में बुनी गई। सलमान खान ने जहां अपनी छवि के विपरीत अच्छी भूमिका अदा की, वहीं उनका साथ नवाजउद्दीन सिद्दकी ने भी बखूबी निभाया है, लेकिन फिल्म की असली जान है वह मासूम और दिलकश बालिका जिसका नाम फिल्म में शाहिदा है। इस बच्ची ने कमाल का अभिनय किया है और दर्शकों को पूरी फिल्म से जोड़कर रखती है और फिल्म के अंतिम दृश्य में जब यह गूंगी बच्ची मामा बोलती है तब अधिकांश दर्शकों की आंखें पनीली हो जाती हैं। 
 
वाकई इस बच्ची ने बड़ी शिद्दत से अपने किरदार को ना सिर्फ अदा किया, बल्कि दर्शकों के साथ एक दिली और जज्बाती रिश्ता भी कायम किया। पूरी फिल्म में गूंगी बनी इस बच्ची ने अपने हाव-भाव से ही दर्शकों को मोह लिया। टिकट खिड़की पर बजरंगी भाईजान नए रिकॉर्ड बना रही है और सलमान खान को इस बार भी अपने प्रशंसकों ने जोरदार ईदी दे दी है। (लेखक जाने-माने हिन्दी पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक हैं) 
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