Hanuman Chalisa

सोशल मीडिया पर तरह-तरह के ट्रोल

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
सोमवार, 13 फ़रवरी 2017 (13:29 IST)
#माय हैशटैग
आजकल राजनैतिक लड़ाइयां सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही हैं। सोशल मीडिया पर ही फैसला हो जाता है कि मतदान केन्द्र पर क्या होने वाला है? इसके लिए राजनैतिक पार्टियां एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। कार्यकर्ताओं को कुछ इस तरह की ट्रेनिंग भी दी जा रही है कि वे अपने विरोधियों को हर तरीके से नीचा दिखाएं। यह कोई बहुत अच्छी बात नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रेंड तो यही है। 
विरोधी विचारधारा वाले के लिए अपमानजनक संदेश, कार्टून, फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करना आम बात हो गई है। टेक्स्ट में तो विरोधी के लिए कुछ भी कहना आसान है, लेकिन वह आम लोगों का ध्यान नहीं खींच पाता। लक्ष्य यह होता है कि किसी भी तरह अपने विरोधी का मुंह बंद कर दो। गालियां देनी हो तो गालियां दो, मजाक बनाना हो तो मजाक बनाओ। सामने वाले को इतना लज्जित कर दो कि वह आगे सोशल मीडिया पर आए ही नहीं।
 
असहिष्णुता का मुद्दा भी कुछ ऐसा ही था। राजनैतिक विरोधी चाहे जो भी हो, कलाकार हो या लेखक, नेता हो या सामाजिक कार्यकर्ता उसे नीचा दिखाना ही है। इसे इन्सल्ट ट्रोल कहा जाता है। सामने वाले के प्रति नफरत का भाव प्रकट करने के लिए कोई भी कारण होना जरूरी नहीं है। उसका नाम लो और गालियां दो। इतना नकारात्मक लिखो कि सामने वाला शर्म से लज्जित हो जाए। इसे साइबर बुलिंग भी कहा जाता है।
 
आक्रामक ट्रोल भी बहुत चर्चा में है। किसी साधारण सी बात से भी आप अगर असहमत हो, तो इतना आक्रामक लिखो कि सामने वाला लज्जित हो जाए। इसमें व्यंग्य की धार हो, गालियों की बौछार हो, पैरोडियां हो, लतीफे हों, गरज यह है कि कुछ भी हो, बस सामने वाले पर आक्रामक बने रहो। इसके अलावा डिबेट ट्रोल भी आजकल चलन में खूब है। कोई भी ऐसी छोटी सी चीज उठा लो, कोई भी संदेश, ट्वीट, वीडियो की क्लिप, जीआईएफ फाइल कुछ भी हो, बस उसका बहाना बनाओ और गालियां देते रहो। लोगों को यह लगे कि आप बहस को तवज्जो दे रहे है। 
 
लैंग्वेज और ग्रामर ट्रोल भी बहुत चलन में है। किसी ने टिप्पणी लिखते वक्त जरा सी भी अर्द्धविराम या पूर्णविराम की भी गलती कर दी कि उस पर पिल पड़ो। लिख दो कि सामने वाला निहायत ही कमजर्फ व्यक्ति है, उसे कोई अक्ल नहीं। उसे तो भाषा तक लिखना नहीं आता, ग्रामर के नियम उसके खानदान में किसी ने नहीं पढ़े। इसी के साथ अतिरंजना वाले ट्रोल भी बहुत चर्चा में है। कोई एक बात कहे और आप उसे बढ़ा-चढ़ाकर इतनी बार लिखने रहो कि सामने वाले को भविष्य में कुछ भी लिखने से पहले हजार बार सोचना पड़े। 
 
विषय से हटकर किए जाने वाले ट्रोल और एक अक्षर के ट्रोल भी सोशल मीडिया पर बहुत महत्व रखते है। कई लोग ऐसे है, जो राम कहे जाने पर पूरी रामायण सुनाने लगेंगे। सामाजिक न्याय लिख दो, तो वे पुणे पैक्ट तक चले जाएंगे। इतिहास को तार-तार कर देंगे। नायक को खलनायक और खलनायक को नायक बना देंगे और ऊपर से शेखी बघारेंगे कि ज्ञान की पूरी गंगा तो उन्हीं के पास है। इसके अलावा कई लोग ऐसे है, जो एक अक्षर या एक शब्द में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर देते है। आप कितनी भी महत्वपूर्ण बात लिखो, वे कमेंट कर देंगे- ‘क्या’, ‘येस’, ‘नो’, ‘के’ आदि-आदि। ये लोग अपने आप को इतना महत्वपूर्ण बताते है कि ओके के दो अक्षर टाइप करना भी इनको गवारा नहीं। लगता है ये सोशल मीडिया के यूजर नहीं, किसी महान मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ है। 
 
बिना बात के ट्रोल करने वालों की भी बढ़ी संख्या है। अपने आप में कुंठित हो चुके लाखों लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय है, जिन्हें दूसरों में कमियां ही कमियां नजर आती है। कुछ ऐसे लोग भी होते है, जिन्हें लाइक्स और फॉलोअर्स की भूख होती है, इन्हें लगता है कि पूरी दुनिया इनकी हर बात को लाइक करें और उनको फॉलो करती रहे। इस तरह के लोगों को यह मुगालता होता है कि वे दुनिया के महानतम लोग है। 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत

World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

अगला लेख