कठुआ कांड : तीन को 25-25 साल की सजा, पुलिसवाले भी नपे

Webdunia
सोमवार, 10 जून 2019 (17:08 IST)
पठानकोट। पिछले साल जनवरी में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 वर्षीय बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या से देश को हिलाकर रख देने के मामले में करीब 18 माह बाद सोमवार को फैसला आया। विशेष अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी सांझीराम समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद (25-25 साल) की सजा और तीन को 5-5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
 
10 जनवरी 2018 को बकरवाल समुदाय की आठ वर्ष की मासूम बालिका का अपहरण करने के बाद कई दिनों तक उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर हत्या कर दी गई। बालिका का क्षत-विक्षत शव अपहरण के एक सप्ताह बाद 17 जनवरी को मिला। इस दिल दहला देने वाली घटना से पूरे देश में आक्रोश का माहौल और जगह-जगह धरना प्रदर्शन हुए।
 
अदालत ने मंदिर के पुजारी सांझीराम, दीपक खजूरिया और प्रवेश कुमार को उम्रकैद की सजा के साथ तीनों पर एक-एक लाख का जुर्माना लगाया है। तीन अन्य दोषियों आनंद दत्ता, सुरेंद्र कुमार और तिलक राज को सबूतों को मिटाने का दोषी मानते हुए 5-5 साल की सजा सुनाई है। यह तीनों पुलिसकर्मी हैं। उम्र कैद की सजा पाया खजूरिया भी पुलिस अधिकारी था। सांझीराम, प्रवेश कुमार और दीपक खजूरिया को हत्या, बलात्कार, साजिश और अपहरण का दोषी माना गया।
 
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने का आदेश दिया और इसके बाद मामले को पठानकोट की अदालत में हस्तांतरित किया गया। इस मामले में कुल गिरफ्तार आठ आरोपियों में एक नाबालिग था। किशोर आरोपी के खिलाफ अभी मामला शुरू नहीं हुआ है क्योंकि उसकी उम्र संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है।
      
इस घटना का मास्टर माइंड सांझीराम राजस्व विभाग का सेवानिवृत्त अधिकारी है और उसी ने इस झकझोर देने वाली घटना की साजिश रची। सांझीराम रासना गांव में मंदिर का सेवादार था और उसने बकरवाल समुदाय को इलाके से हटाने के लिए मासूम बालिका के सामूहिक बलात्कार का षड्‍यंत्र बना।
      
पुलिस ने बताया था कि आरोपियों ने बालिका के अपहरण के तीन दिन बाद 13 जनवरी को उसकी हत्या कर दी थी। मौसम बहुत ठंडा होने की वजह से उन्हें इसके सड़ने की चिंता नहीं थी और 16 जनवरी तक बालिका के शव को मंदिर के अंदर ही रखे रहे।
 
मामले की जांच करने वाले अधिकारी ने बताया कि बालिका 10 जनवरी को लापता हुई थी और उसके अभिभावक खोजते हुए 11 जनवरी को मंदिर के नजदीक तक गए थे, लेकिन आरोपियों से बड़ी चालाकी के साथ मासूम के माता-पिता को गुमराह किया और वह वहां से चले गए।
 
पुलिस ने बताया था कि बालिका का अपहरण करने वाले किशोर ने बच्ची के मुंह में जबरन नशीला पदार्थ भर दिया था।। बालिका को कई दिन तक मंदिर के अंदर बंधक बनाए रखा गया और उसे लगातार नशीली दवाएं खिलाई जाती रहीं जिससे मासूम अपने साथ हो रहे अत्याचार का विरोध नहीं कर पाई। इस मामले में सातवें आरोपी विशाल को बरी कर दिया गया है। 
 

सम्बंधित जानकारी

सर्वे में बड़ा खुलासा, 82 फीसदी दिव्यांगों का बीमा नहीं, 42% आयुष्मान योजना से अनभिज्ञ

नीतीश कुमार ने किया वादा, भाजपा से फिर कभी नहीं तोड़ेंगे नाता

म्यांमार में मुश्किलें कम नहीं, भूकंप की त्रासदी से उबरने का संघर्ष, विद्रोहियों से भी जंग

संघ मुख्यालय पहुंचने वाले दूसरे पीएम बने मोदी, क्यों खास है यह दौरा?

म्यांमार की मदद के लिए भारत ने चलाया 'ऑपरेशन ब्रह्मा', जानिए क्या-क्या भेजा

दिल्ली में LPG सिलेंडर से हुआ गैस रिसाव, आग लगने से नाबालिग भाई बहन की मौत

दिल्ली में 7 वर्षीय बच्ची की गला रेतकर हत्या, पिता और उसके परिचित पर संदेह

मुझे आधे घंटे तक रोका, ईद पर ऐसी बैरिकेडिंग कभी नहीं देखी, अखिलेश का योगी पर हमला

म्यांमार के भूकंप में 700 से अधिक मुसलमानों की मौत, 60 मस्जिदें क्षतिग्रस्त या नष्ट

दंतेवाड़ा जिले में मुठभेड़ के दौरान महिला माओवादी ढेर, हथियार और गोला बारूद बरामद

अगला लेख