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Corona से डरना जरूरी है, नहीं तो फिर बढ़ जाएंगी मुश्किलें...

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वृजेन्द्रसिंह झाला

बुधवार, 17 फ़रवरी 2021 (08:32 IST)
कोरोनावायरस (Coronavirus) ने एक बार फिर लोगों को डराना शुरू कर दिया है। चाहे वह न्यूजीलैंड का ऑकलैंड शहर हो जहां लॉकडाउन लगा दिया गया या फिर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु हो जहां एक अपार्टमेंट में 100 से ज्यादा कोविड-19 के मामले सामने आए हैं। इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि यदि लापरवाही जारी रही तो कोरोना एक बार फिर लोगों को मुश्किल में डाल सकता है। हालांकि यह बात भी सही है कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं बल्कि ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।  
 
भारत में भले ही कोरोना के मामलों में कमी आ रही हो, लेकिन महाराष्ट्र तथा केरल में आ रहे मामले जरूर लोगों के माथे पर चिंता की लकीरों को और गहरा कर रहे हैं। देश के लगभग 70 फीसदी मामले इन दोनों राज्यों से ही हैं। गत रविवार को महाराष्ट्र में रविवार को कोरोना के मामलों की संख्या 4 हजार के पार चली गई थी। 40 दिनों में यह पहला मौका था जब आंकड़ा 4 हजार के पार गया।
 
मुंबई में लॉकडाउन की चेतावनी : मुंबई में भी कोरोना केसेस की बढ़ती संख्या के बीच मेयर किशोरी पेडणेकर ने कहा है कि यदि लोग समय रहते नहीं चेते तो मुंबई में फिर एक बार लॉकडाउन हो सकता है। उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि ट्रेन में यात्रा करने वाले ज्यादातर लोग मास्‍क नहीं पहन रहे।
 
दूसरी ओर महाराष्ट्र के ही अमरावती शहर में कोरोना केस बढ़ने के बाद नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। सोमवार को अमरावती जिले में 449 नए मामले सामने आए थे। हालांकि जिले कलेक्टर शैलेष नवल ने कहा कि लोगों द्वारा ज्यादा टेस्ट करवाने के चलते नए मामले सामने आए हैं। 
 
बेंगलुरु में बना नया कंटेनमेंट झोन : इसमें कोई संदेह नहीं कि लोगों ने अब कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है। यही कारण बेंगलुरु जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बेंगलुरु के एक अपार्टमेंट में 103 लोग संक्रमित पाए गए। ये सभी लोग एक पार्टी में शामिल हुए थे। जहां से ये मामले सामने आए उस अपार्टमेंट को कंटेनमेंट झोन घोषित कर दिया गया। इसी तरह फरवरी की शुरुआत में कर्नाटक के एक नर्सिंग होस्टल में 40 विद्यार्थी संक्रमित पाए गए थे। हालांकि इनके बारे में कहा गया था कि ये सभी केरल से आए थे।
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इस संबंध में डॉ. प्रीति सिंह कहती हैं कि लोगों में कोरोना का डर खत्म हो गया है। वे लापरवाही बरतने लगे हैं। मास्क और सैनेटाइजर का उपयोग करना उन्होंने बंद कर दिया। इसके साथ ही मौसम में जो उतार-चढ़ाव आ रहा है वह भी संक्रमण बढ़ने का एक कारण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत से बाहर जाने वालों की तो स्क्रीनिंग और टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन ट्रेन और बस में जाने वालों पर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में एक संक्रमित व्यक्ति कई लोगों को संक्रमित कर सकता हैं। एसिम्टोमैटिक लोगों से भी दूसरों को संक्रमण हो सकता है।

उधर, गुजरात में मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी के साथ दो और बड़े भाजपा नेताओं के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद राज्य के प्रमुख शहरों में रात का कर्फ्यू 15 से बढ़ाकर 28 फरवरी तक कर दिया गया है। लोगों में अब तक हर्ड इम्यूनिटी नहीं आई है। ऐसे में कोविड की गाइडलाइन का उल्लंघन महंगा पड़ सकता है।

प्रायवेट सैक्टर को मिले वैक्सीन : डॉ. सिंह कहती हैं कि कोरोना की शुरुआत के समय कहा गया था कि इसे जाने में 2 साल लगेंगे, इसलिए अभी किसी भी तरह की ढील या लापरवाही मुश्किल बढ़ा सकती है। वे कहती हैं कि वैक्सीनेशन चेन को और मजबूत करने की जरूरत है, जो कि फिलहाल प्रॉपर नहीं हो पा रहा है। ज्यादा अच्छा होगा कि अच्छे वैक्सीन को प्रायवेट सैक्टर को देना चाहिए चाहिए ताकि लोग पैसे देकर टीकाकरण करवा सकें। 
 
इंदौर में भी मामले बढ़े : नगरीय निकाय चुनाव की आहट के बीच मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर कोरोना केसेस बढ़ने लगे हैं। 10 फरवरी को शहर में 1968 सैंपलों की जांच में सिर्फ 33 लोग संक्रमित मिले थे। वहीं शनिवार यानी 13 फरवरी को 1756 सैंपलों की जांच में ही 73 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 14 फरवरी को जहां 89 संक्रमित सामने आए थे, वहीं 15 फरवरी को 93 कोरोना पॉजिटिव आए थे। इन आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ दिनों कोरोना का ग्राफ ऊपर की ओर ही जा रहा है। ऐसे में कोई भी असावधानी संक्रमितों की संख्‍या में इजाफा कर सकती है। 
 
उल्लेखनीय है कि भारत में संक्रमितों का आंकड़ा 1 करोड़ 9 लाख 25 हजार से ज्यादा हो गया है, जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 1 लाख 55 हजार से ज्यादा हो गई है। 
 

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