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500 प्रतिभाशाली महिलाओं की संगोष्ठी

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, शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018 (20:09 IST)
बेंगलुरु। 250 प्रतिनिधि, 75 वक्ता, 100 ग्रामीण महिलाएं, 60 से अधिक कॉलेज छात्राएं व 60 देशों की महिलाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन के 8वें संस्करण की शानदार शुरुआत आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, स्थित भव्य विशालाक्षी मंडप में एक लाख से ज्यादा वैश्विक दर्शकों की मौजूदगी में हुई।
 
 
500 से अधिक शक्तिशाली और साहसी महिलाओं की उपस्थिति के बीच कई गणमान्य हस्तियां भी मौजूद थीं, इनमें सम्मेलन की मुख्य वक्ता के रूप में डी. रूपा आईजीपी, कर्नाटक, अरुंधति भट्टाचार्य, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्ष सहित चेतना गाला सिन्हा, संस्थापक-अध्यक्ष मानव देशी बैंक और मान देशी फाउंडेशन, रानी मुखर्जी भारतीय अभिनेत्री, डॉ. जिको हेवेनी, फ़िजी संसद में पहली महिला अध्यक्ष उपस्थित थे।
 
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने कहा कि आध्यात्मिकता लैंगिकता से ऊपर उठाती है। उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संगठनों का नेतृत्व करने के लिए महिलाओं का समर्थन किया। सभी देशों में लिंग समानता को सम्मानित किया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया तभी तेज और सरल होगी जब कोई महिला धार्मिक नेता सामने आए। 
 
विभिन्न क्षेत्र जैसे- आर्थिक, राजनीतिक, संगीत, चिकित्सा, सामाजिक सेवा, कला और मनोरंजन में अपना एक ख़ास मुकाम बनाने वाली महिलाओं को अपने पेशेवर और व्यक्तिगत क्षेत्रों में अंतर बनाने के लिए उनके प्रभावशाली और उल्लेखनीय योगदान के लिए विशालाक्षी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
 
समारोह में आचार्य रतानंद पुरस्कारों के माध्यम से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने में पुरुषों की भूमिका को पुरुस्कृत किया गया। ये द्विवार्षिक पुरस्कार गुरुदेव के माता-पिता द्वारा समाज के लिए की गई सेवा की स्मृति में स्थापित किए गए हैं।
 
ये पुरस्कार व्यक्तियों न केवल प्रयासों को सम्मानित करते हैं बल्कि मानव मूल्यों के सिद्धांतों का भी उत्सव मानते हैं। पुरस्कार विजेताओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। इंटरनेशनल महिला सम्मेलन के अध्यक्ष श्रीमती भानुमती नरसिम्हन ने कहा कि हमारे जीवन में कुछ नया होने की संभावना तब होती है जब हम अज्ञात की ओर कदम बढ़ाते हैं।
 
'जीवन : एक रहस्यमय यात्रा,' के शीर्षक नामक इस 3 दिवसीय सम्मेलन में कलाकारों, नीति निर्माताओं और अन्य लोगों के साथ खेलकूद से जुड़ी महिलाएं भी भाग ले रही हैं, जो आध्यात्मिक शांति और सशक्तीकरण के संदेश को बढ़ाने के तरीके तलाश करेंगी।
 
सम्मेलन में बोलते हुए अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने कहा कि एक अभिनेता के रूप में मेरा लक्ष्य बदल गया है। अब यह पुरस्कार जीतने या बॉक्स ऑफिस पर आग लगाने के बारे में नहीं है, बल्कि उन कहानियों को बयां करने के बारे में है, जिनमें परिवर्तन लाने की संभावना है। 
 
इस वर्ष, आईडब्ल्यूसी का मुख्य ध्यान भारत को खुले में शौच से मुक्त जिलों के बारे में बताना है। चरण 1 में, संगठन ने 7 राज्यों की 12 ग्राम पंचायतों में शौचालयों के उपयोग के प्रति संवेदीकरण और जागरूकता की दिशा में काम किया है। द्वितीय चरण में, 4000 शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।
 
सम्मेलन के दूसरे और तीसरे दिन कई अधिक सत्र होने वाले हैं, जिनमें कई सशक्त और आदर्श महिलाएं अपनी कहानी बताएंगी जिनमें- जियान अब्दुल्ला मेरानी, संस्थापक, रोनेही फाउंडेशन, कुर्दिस्तान, सुश्री रसेल गुजराल अंसल, जीवन शैली डिजाइनर, डॉ. विजीता एम आइंगो, संस्थापक और जैसे युवा महिलाओं की कहानियां बनाए रखेंगे। यूसीएलए में महिला नेतृत्व पहल के कार्यकारी निदेशक और अरुंधति भट्टाचार्य, पूर्व बैंकर, शैफा अल शाइबा, पैरा-एथलीट प्रमुख हैं।

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