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ईरान पर अमेरिका-इजराइल का बड़ा हमला : क्या मोदी की यात्रा और 'स्ट्राइक' की टाइमिंग महज इत्तेफाक है?

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ईरान पर अमेरिका-इजराइल का बड़ा हमला
Israel Iran War 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) के समीकरण रातों-रात बदल गए हैं। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य ऑपरेशन इजराइल और अमेरिका का एक 'संयुक्त हमला' है। इस हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस ऑपरेशन की 'टाइमिंग' को लेकर हो रही है।

पीएम मोदी के निकलते ही लगा आपातकाल

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी इजरायल की अपनी दो दिवसीय (25-26 फरवरी 2026) ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटे ही थे कि इजराइल में इमरजेंसी (आपातकाल) की घोषणा कर दी गई। इसके तुरंत बाद 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के तहत ईरान के कई शहरों पर मिसाइलों की बारिश शुरू हो गई।

क्या नेतन्याहू ने मोदी से की थी चर्चा?

राजनीतिक गलियारों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संभावित स्ट्राइक का जिक्र पीएम मोदी से किया था?
  • रणनीतिक चुप्पी : हालांकि भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर के ऑपरेशन की योजना महीनों पहले बनती है।
  • विशेष साझेदारी : यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को 'Special Strategic Partnership' का दर्जा दिया है, जो इस कयास को और बल देता है।
  • बड़ा सवाल : क्या भारत को 'पक्ष' बनाने की कोशिश है?
इस हमले के लिए पीएम मोदी की विदाई के ठीक बाद का समय चुना जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
 
  • कूटनीतिक जाल : क्या अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर इस समय को चुना ताकि दुनिया को यह संदेश जाए कि भारत इस हमले में उनके साथ खड़ा है?
  • भारत की विदेश नीति का इस्तेमाल : विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे भारत की 'स्वतंत्र विदेश नीति' (Strategic Autonomy) को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देख रहा है।

ईरान के साथ संबंध

भारत के ईरान के साथ पुराने और मजबूत संबंध हैं (जैसे चाबहार पोर्ट)। इस हमले की टाइमिंग से ऐसा लग सकता है कि भारत अब पूरी तरह से इजराइल-अमेरिका खेमे में जा चुका है, जो भारत की संतुलित विदेश नीति के लिए एक चुनौती बन सकता है।
 
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और इजराइल पर मिसाइलें दागने की खबरें आ रही हैं। हिज्बुल्ला और हूती भी ईरान के समर्थन में इस जंग में उतर गए हैं। इस बीच, रूस ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि शांति दूत ट्रंप ने अपना असली रंग दिखा दिया है। पूरी दुनिया की नजर अब भारत के रुख पर है। क्या भारत इस तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा या अपनी 'मौन' कूटनीति पर कायम रहेगा?

कांग्रेस ने उठाए सवाल : कांग्रेस ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद शनिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों युद्ध के हालात के बावजूद इजराइल का 'शर्मनाक दौरा' किया। मुख्य विपक्षी दल ने यह सवाल भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इजराइल दौर का उपयोग तनाव कम करने के लिए क्यों नहीं किया या फिर वह इस युद्ध का समर्थन करते हैं?
 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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