मोदी राज में डूबी जेट, जानिए 6 बड़ी बातें

गुरुवार, 18 अप्रैल 2019 (14:41 IST)
एक तरफ जब रिलायंस के शेयर आसमान में उड़ान भर रहे थे, उसी दौरान जेट एयरवेज के शेयर 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़े। इसका असर यह हुआ कि निवेशकों के 700 करोड़ डूब गए। स्थितियां यह हैं कि जेट एयरवेज अब लगभग डूब गई है, दूसरी ओर हजारों कर्मचारियों पर रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है। आखिर क्या कारण रहे कि जेट एयरवेज इस स्थिति तक पहुंची और इसका देश पर क्या असर होगा। आइए जानते हैं....
 
कंपनी पर 8500 करोड़ का कर्ज : 25 साल पहले शुरू हुई यह कंपनी कई वर्षों तक मुनाफे में रही। हालांकि 2010 के बाद कंपनी पर कर्ज बढ़ने लगा। इसके बाद कंपनी बैंकों के कर्ज का भुगतान नहीं कर पाई। देखते ही देखते कंपनी पर 8500 करोड़ का कर्ज हो गया। साथ ही, विमान परिचालन के लिए कंपनी के पास पैसा खत्म हो गया। घाटे के चलते कंपनी ने इस पर किराए में भारी वृद्धि कर दी। इस वजह से लोगों का भी जेट से मोहभंग होने लगा।
 
पिछले महीने तैयार योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक को जेट एयरवेज में 1500 करोड़ रुपए लगाने हैं। जेट एयरवेज ने बैंकों से 400 करोड़ रुपए के आपात फंड की मांग की है। इसके साथ ही जेट ने कुछ समय पहले शेयरधारकों से 84 करोड डॉलर (करीब 5,880 करोड़ रुपए) के बेलआउट पैकेज की भी मांग की थी। गौरतलब है कि नरेश गोयल ने जेट एयरवेज की शुरुआत आज से करीब 25 साल पहले की थी, लेकिन 2010 के बाद कंपनी पर कर्ज बढ़ने लगा। ऐसे में कंपनी मुनाफे से घाटे में आ गई और कर्ज का भुगतान नहीं कर पाई। 
 
निगाहें सरकार की ओर : माना जा रहा है कि कंपनी डूबी तो लगभग 20 हजार से ज्यादा लोगों का रोजगार छिन जाएगा। कर्मचा‍री यूनियन ने सरकार से सवाल पूछा है कि वो कब 22 हजार कर्मचारियों की मदद करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कर्मचारी यूनियन ने जेट एयरवेज को फिर से शुरू करने की अपील की है। यूनियन ने कहा कि 16 हजार कर्मचारी बेकार हो गए हैं। 40-45 की उम्र के बाद कोई कंपनी लोगों को नौकरी पर भी नहीं रखती। ऐसे में यह संकट जितना दिख रहा है, उससे भी बड़ा है। 
 
निवेशकों को 700 करोड़ का नुकसान : जेट एयरवेज के अस्थाई तौर पर ऑपरेशन बंद करने की खबरों के बाद गुरुवार यानी 18 अप्रैल की सुबह कंपनी के शेयर में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों के कुछ ही मिनटों में 700 करोड़ रुपए से ज्यादा डूब गए। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी को लेकर फिलहाल कुछ भी साफ नहीं है ऐसी स्थिति में लोगों को निवेशकों को घाटे की स्थिति में ही शेयर बेचकर निकल जाना चाहिए।
 
जेट को खरीदना चाहती हैं यह तीन कंपनियां : जेट एयरवेज अपने पुराने कर्ज का भुगतान नहीं कर सका है। ऐसे में कंपनी पर अब बैंकों का नियंत्रण है। बैंकों ने कंपनी की नीलामी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष एनआईआईएफ, निजी क्षेत्र के टीपीजी और इंडिगो इसे खरीदने की दौड़ में सबसे आगे हैं। अगर इनमें से कोई कंपनी को खरीद लेता है तो एयरलाइंस फिर से शुरू हो सकती है।
 
मदद के लिए आगे आया डीजीसीए : नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गुरुवार को नकदी संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की एयरलाइन जेट एयरवेज को ठोस और विश्वसनीय पुनरोद्धार योजना पेश करने को कहा है। हालांकि, डीजीसीए ने नियामकीय दायरे में रहते हुए एयरलाइन की मदद का भी भरोसा दिलाया है।
 
ग्राहक असमंजस में : जेट एयरवेज की उड़ान बंद होने के बाद विमान यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन ग्राहकों ने जेट एयरवेज के विमान का टिकट कराया है, उन्‍हें एयरलाइन की ओर से जल्‍द ही पैसा रिफंड किया जाएगा। डीजीसीए ने अन्य एविएशन कंपनियों को उड़ानों के फेरे बढ़ाने को कहा है।

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