किसान घाट पर जाकर थमा आंदोलन, कम नहीं हुआ किसानों का गुस्सा, सरकार कर सकती है बड़ा ऐलान

बुधवार, 3 अक्टूबर 2018 (07:24 IST)
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के बैनर तले 'किसान क्रांति पदयात्रा' दिल्ली के किसान घाट पहुंचकर बुधवार को खत्म हो गई। यहां सभी किसान अपने घर की ओर लौटने लगे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों के प्रति केंद्र सरकार का रवैया ठीक नहीं है।  पुलिस ने बताया कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने मंगलवार की मध्यरात्रि के बाद बैरिकेड्‍स को हटा दिया और किसान क्रांति पदयात्रा के दौरान रोके गए किसानों को दिल्ली में प्रवेश और किसान घाट की ओर जाने की अनुमति दे दी। 
 
किसान अपने ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों पर सवार होकर राष्ट्रीय राजधानी में घुसे और किसान घाट की ओर बढ़े। वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कृषि ऋण माफी से लेकर ईंधन की कीमतों में कटौती समेत विभिन्न मांगों को लेकर हजारों किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की तरफ कूच किया था। इससे दिल्ली की ओर आने वाली सड़कों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
 
राष्ट्रीय राजधानी की ओर से आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा था। वे पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोंडा, बस्ती और गोरखपुर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए थे।
 
पुलिस ने उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमा को सील कर दिया था। निषेधाज्ञा लगाते हुए पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने, एंप्लीफायर, लाउडस्पीकरों और इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
 
हरिद्वार से शुरू हुई थी यात्रा : किसान क्रांति पदयात्रा 23 सितंबर को हरिद्वार में टिकैत घाट से शुरू हुई थी। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान शामिल हुए थे। किसान पैदल, बस और ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर पहुंचे थे। उनके हाथों में भारतीय किसान संघ (भाकियू) के बैनर थे। भाकियू ने कई मांगों को लेकर मार्च का आह्वान किया था।
 
ये थीं किसानों की मांगें : इनकी मांगों में किसानों की कर्ज माफी, चीनी मिलों के बकाए का भुगतान, फसलों की अधिक कीमत, खेती के लिए मुफ्त बिजली और डीजल की कीमतों में कटौती शामिल थी।

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