पाकिस्तान की 'आतंकी' सेना LoC पर जुटी, हमले की आशंका

सुरेश एस डुग्गर
शनिवार, 13 जून 2020 (19:01 IST)
जम्मू। पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम के उल्लंघन में हुई हालिया बढ़ोतरी के कारण जम्मू-कश्मीर में एलओसी से सटे इलाकों में बढ़े तनाव के बीच सेना ने शनिवार को बताया कि उन्हें प्राप्त सूचना के मुताबिक, पाकिस्तान एलओसी पर और अधिक कमांडो हमले की कोशिश कर रहा है।
 
बॉर्डर रेडर्स के नाम से जाने जाने वाले यह कमांडो पाकिस्तान के विशेष बलों के कर्मियों और आतंकियों का एक 
मिलाजुला स्वरूप है। पिछले कुछ सालों में पाक बॉर्डर रेडर्स भारत के कई सैनिकों की नृशंस हत्या कर चुका है। कई के वह सिर भी काटकर ले जा चुका है।
 
वैसे एलओसी पर बॉर्डर रेडर्स के हमले कोई नए नहीं हैं। इन हमलों के पीछे का मकसद हमेशा ही भातीय सीमा 
चौकियों पर कब्जा जमाना रहा है। पाकिस्तानी सेना की कोशिश कोई नई नहीं है। करगिल युद्ध की समाप्ति के बाद हार से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने बार्डर रेडर्स टीम का गठन कर एलओसी पर ऐसी बीसियों कमांडों कार्रवाईयां करके भारतीय सेना को जबरदस्त क्षति सहन करने को मजबूर किया है।
 
26 जुलाई 1999 को जब करगिल युद्ध की समाप्ति की घोषणा हुई तो उधर पाक सेना ने अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देना आरंभ कर दिया था। उसने त्रिस्तरीय रणनीति बनाई जिसके पीछे का मकसद भारतीय सेना को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाना तो था ही कश्मीर में भी लोग त्राहि-त्राहि कर उठे थे।
 
करगिल युद्ध के बाद ही फिदायीनों, मानव बमों के हमलों की भी शुरूआत हुई थी। साथ ही शुरूआत हुई थी भारतीय सीमा चौकिओं पर बार्डर रेडर्स के हमलों की। हालांकि सैन्य सूत्र कहते हैं कि पाक सेना द्वारा गठित बार्डर रेडर्स में आतंकी भी शामिल होते हैं जिन्हें हमलों में इसलिए शामिल किया जाता रहा है ताकि वे कश्मीर में घुसने के बाद वहशी कृत्यों को अंजाम दे सकें। पिछले 21 सालों में कितनी बार पाक सेना के बार्डर रेडर्स ने भारतीय सीमा चौकिओं पर हमले किए कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है।
 
इतना जरूर था कि बार्डर रेडर्स के हमले ज्यादातर एलओसी के इलाकों में ही हुए थे। इंटरनेशनल बार्डर पर पाक सेना ऐसी हिम्मत नहीं दिखा पाई थी। जबकि राजौरी और पुंछ के इलाके ही बार्डर रेडर्स के हमलों से सबसे अधिक त्रस्त इसलिए भी रहे थे क्योंकि एलओसी से सटे इन दोनों जिलों में कई फारवर्ड पोस्टों तक पहुंच पाना दिन के उजाले में संभव इसलिए नहीं होता था क्योंकि पाक सेना की बंदूकें आग बरसाती रहती थी।
 
बार्डर रेडर्स के हमलों को कश्मीर सीमा पर स्थित सैन्य पोस्टों में तैनात जवानों ने भी सीजफायर से पहले की अवधि में सहन किया है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय इलाके में घुस कर भारतीय जवानों के सिर काट कर ले जाने की  घटनाओं को भी इन्हीं बॉर्डर रेडर्स ने अंजाम दिया था। जबकि 12 साल पहले उड़ी की एक उस पोस्ट पर कब्जे की लड़ाई में भारतीय वायुसेना को भी शामिल करना पड़ा था जिसे भारतीय सैनिकों ने भयानक सर्दी के कारण खाली छोड़ दिया था।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

Heart Attack और stroke से बचने के लिए china ने बनाई वैक्सीन, क्या किया दावा

ट्रेन हाईजैक में मौत का आंकड़ा सैकड़ों में? पाकिस्तान सरकार ने क्वेटा भेजे 200 से ज्यादा ताबूत

कयामत के दिन जैसा खौफनाक मंजर था, जाफर एक्सप्रेस के यात्रियों की आपबीती

Train Hijack में भारत का हाथ, पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने पार की बेशर्मी की हद, तालिबान का क्यों लिया नाम

BSNL का सस्ता प्लान, 6 महीने की वैलिडिटी, डेटा खत्म होने के बाद भी चलता रहेगा इंटरनेट

सभी देखें

नवीनतम

रुपया एक पैसे की गिरावट के साथ 87.22 प्रति डॉलर पर

मप्र के बजट को लेकर कांग्रेस ने साधा निशाना, Budget को बताया खोखले वादों से भरा

कैग ने रेलवे में 2604 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पकड़ी, सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए : संजय सिंह

pakistan train hijack : 30 घंटे बाद ऑपरेशन पूरा, 33 विद्रोही ढेर, BLA का दावा- उसके कब्जे में अभी भी 150 से ज्यादा पाक नागरिक

क्‍या अब खत्म होंगे दिल्ली सरकार और LG के बीच विवाद, भाजपा सरकार वापस ले रही सभी कोर्ट केस

अगला लेख