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मणिपुर में भूकंप से हिली धरती: 5.2 रही तीव्रता, नागालैंड और असम तक महसूस किए गए झटके

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Earthquake in manipur
Manipur Earthquake : मणिपुर में मंगलवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नागालैंड, असम और मेघालय में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप से जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
 
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र मणिपुर के कामजोंग में था। भूकंप की गहराई 62 किलोमीटर थी। इससे पहले 7 अप्रैल को भी मणिपुर में भूकंप के 2 झटके महसूस किए गए थे।
 
मणिपुर में भूकंप के झटकों से हड़कंप मच गया। झटके इतने तेज थे कि नींद में सो रहे लोग अचानक जाग गए और अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल गए।
 
इससे पहले मंगलवार को भी उत्तर-पूर्वी जापान में सोमवार को 7.5 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था। भूकंप के शक्तिशाली झटकों को देखते हुए प्रशासन ने 3 मीटर तक की ऊंची सुनामी लहरें उठने की चेतावनी जारी की थी। जापान दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यह 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में मिलती हैं। ALSO READ: Earthquake : जापान में 7.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी, तटीय इलाकों को तुरंत खाली करने के निर्देश
 

कैसे आता है भूकंप?

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।
 

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।
 
इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
 
भूकंप को मापने के लिए रिक्टर के अलावा मरकेली स्केल का भी इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें भूकंप को तीव्रता की बजाए ताकत के आधार पर मापते हैं। इसका प्रचलन कम है, क्योंकि इसे रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है। भूकंप के कारण होने वाले नुकसान के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जैसे घरों की खराब बनावट, खराब संरचना, भूमि का प्रकार, जनसंख्या की बसावट आदि।
edited by : Nrapendra Gupta 

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